मणिपुर: ढाई साल का इंतज़ार और मौत की खामोशी; न्याय मिलने से पहले ही दुनिया छोड़ गई 17 साल की गैंगरेप पीड़िता, CBI जांच पर परिजनों ने उठाए सवाल

तारिक खान

डेस्क: मणिपुर की जातीय हिंसा के दौरान जघन्य अपराधों की शिकार हुई एक और बेटी आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई। 15 मई 2023 को महज 17 साल की उम्र में सामूहिक दुष्कर्म और बर्बरता का शिकार हुई कुकी-ज़ो समुदाय की युवती ने 11 जनवरी को गुवाहाटी के अस्पताल में दम तोड़ दिया। मौत के बाद मणिपुर में तनाव व्याप्त है और जनजातीय संगठनों ने सीबीआई (CBI) की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ट्रॉमा और बीमारियों से लड़ते बीता ढाई साल पीड़िता की माँ ने बिलखते हुए बताया कि गैंगरेप की उस भयानक घटना के बाद से ही उनकी बेटी गंभीर शारीरिक और मानसिक आघात (Trauma) में थी। वह गर्भाशय की समस्याओं और मनोवैज्ञानिक विकारों से जूझ रही थी। माँ ने बताया, “वह पिछले ढाई साल से किसी से बात नहीं करती थी, बस बाइबल पढ़ती थी। 11 जनवरी को अचानक उल्टियां हुईं और सांस लेने में तकलीफ के बाद उसने दम तोड़ दिया।”

क्या था मामला?

  • 15 मई 2023: इंफाल के न्यू-चेकॉन इलाके से युवती को सफेद कार में सवार चार हथियारबंद लोगों ने अगवा किया।
  • बर्बरता: उसे लैंगोल के सुनसान इलाके में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया गया और मारपीट की गई।
  • FIR: जुलाई 2023 में कांगपोकपी थाने में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज हुई, जिसमें हत्या की कोशिश और गैंगरेप जैसी धाराएं लगाई गईं।

CBI जांच पर उठे सवाल: सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह मामला 22 जुलाई 2023 को सीबीआई को सौंपा गया था। कमेटी ऑन ट्राइबल इंटेग्रिटी के प्रवक्ता लुन किपगेन ने रोष जताते हुए कहा, “ढाई साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक न तो आरोप तय हुए और न ही किसी ठोस गिरफ्तारी की जानकारी मिली।” पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें जांच की स्थिति के बारे में कुछ नहीं बताया जा रहा।

मां की गुहार: “क्या इंसाफ सिर्फ पहुंच वालों के लिए है?” पीड़िता की माँ ने भावुक अपील करते हुए सरकार से पूछा, “सरकार ‘बेटी बचाओ’ की बात करती है, लेकिन मेरी बेटी को क्यों नहीं बचाया गया? वह जीते-जी अपराधियों को सलाखों के पीछे नहीं देख पाई। क्या इंसाफ केवल पहुंच वाले लोगों को ही मिलता है?”

मणिपुर में फिर गरमाया माहौल: युवती की मौत के बाद कुकी जनजाति के संगठनों— ITLF और कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ने जवाबदेही की मांग की है। 17 जनवरी को चुराचांदपुर में एक विशाल कैंडल मार्च निकाला गया, जिसमें ‘अनसुलझे अत्याचारों’ के खिलाफ आवाज उठाई गई।

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