‘अजमल कसाब ने भी अवमानना नहीं की थी, पर आपने की है’: आवारा कुत्तों के मुद्दे पर मेनका गांधी के बयानों से सुप्रीम कोर्ट नाराज; पॉडकास्ट और बॉडी लैंग्वेज पर उठाए सवाल

शफी उस्मानी
डेस्क: आवारा कुत्तों (Stray Dogs) की समस्या और उनकी फीडिंग (खाना खिलाने) को लेकर जारी कानूनी लड़ाई अब निजी टिप्पणियों और ‘कोर्ट की अवमानना’ तक पहुँच गई है। मंगलवार, 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनकी टिप्पणियों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया।

“आपने अपनी मुवक्किल से पूछा है कि उन्होंने किस तरह की टिप्पणियां की हैं? क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है और उनकी बॉडी लैंग्वेज देखी है? उन्होंने बिना सोचे-समझे हर किसी के खिलाफ बयान दिए हैं।”
कसाब का जिक्र और ‘अवमानना’ की बहस: सुनवाई के दौरान जब मेनका गांधी के वकील राजू रामचंद्रन ने दलील दी कि वे अजमल कसाब जैसे आतंकियों के पक्ष में भी पेश हो चुके हैं और बजट आवंटन नीतिगत मामला है, तो न्यायमूर्ति नाथ ने बेहद सख्त लहजे में कहा— “अजमल कसाब ने अदालत की अवमानना नहीं की थी, लेकिन आपकी मुवक्किल (मेनका गांधी) ने की है।” हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत अपनी उदारता के कारण फिलहाल अवमानना की औपचारिक कार्यवाही शुरू नहीं कर रही है।
कुत्तों को खिलाने वालों की जवाबदेही पर अड़ा कोर्ट: इससे पहले 13 जनवरी की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि:
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कुत्तों के काटने पर राज्यों से “भारी मुआवजा” दिलाया जाएगा।
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जो लोग आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उनकी जवाबदेही तय की जाएगी।
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पिछले 5 सालों से आवारा जानवरों से जुड़े नियमों को लागू न करना गंभीर चिंता का विषय है।
अदालत ने आज फिर दोहराया कि कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराने वाली उसकी पिछली टिप्पणी कोई ‘व्यंग्य’ नहीं, बल्कि एक गंभीर विचार था, जिसे सुनवाई के दौरान व्यक्त किया गया था।
अगली कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गांधी के वकील से पूछा कि पूर्व मंत्री रहते हुए उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए क्या बजटीय प्रयास किए? फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और कोर्ट आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए गाइडलाइंस तैयार कर रहा है।











