इंदौर जल त्रासदी: ‘स्मार्ट सिटी’ के नाम पर जनता को मिल रहा ज़हर? पीड़ितों से मिले राहुल गांधी; बोले— “इंदौर में साफ़ पानी मिलना मुश्किल, लोग मर रहे हैं”

शफी उस्मानी
डेस्क: स्वच्छता में सात बार अव्वल रहने वाले इंदौर शहर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद, शनिवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इंदौर पहुँचे। उन्होंने शोकाकुल परिवारों और अस्पताल में भर्ती मरीजों से मुलाकात कर प्रदेश की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया।

“मुझसे प्रभावित परिवारों ने अपनी पीड़ा साझा की है। सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह जनता को साफ पानी दे और प्रदूषण कम करे, लेकिन यहाँ सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रही है।”
स्मार्ट सिटी मॉडल पर तंज: इंदौर को ‘स्मार्ट सिटी’ कहे जाने पर तंज कसते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह “नए मॉडल की स्मार्ट सिटी” है, जहाँ लोगों को पीने का पानी तक मयस्सर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर जैसे बड़े शहर में भी लोगों को साफ पानी नहीं मिल पा रहा है और इस बदइंतजामी के खिलाफ आवाज उठाने वालों को डराया-धमकाया जा रहा है।
क्या है भागीरथपुरा का मामला? बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले दिनों पाइपलाइन में लीकेज और सीवेज का पानी मिलने की वजह से पेयजल दूषित हो गया था। इसे पीने से दर्जनों लोग बीमार पड़ गए और कई लोगों की मौत हो गई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से इसकी शिकायत की थी, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया।
सियासी गरमाहट: राहुल गांधी के इस दौरे ने मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। कांग्रेस अब इस मुद्दे को लेकर इंदौर नगर निगम और राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने की तैयारी में है। वहीं, बीजेपी ने राहुल के आरोपों को ‘राजनीति’ करार दिया है।











