NYC मेयर की शपथ और दो क़ुरान का रहस्य: दादा की विरासत और शॉमबर्ग के इतिहास पर हाथ रखकर ज़ोहरान ममदानी ने रचा इतिहास

तारिक खान
न्यूयॉर्क: 1 जनवरी 2026 की आधी रात को जब पूरी दुनिया नए साल का जश्न मना रही थी, तब न्यूयॉर्क के पुराने सिटी हॉल सबवे स्टेशन की गहराई में एक नया इतिहास लिखा जा रहा था। भारतीय मूल के ज़ोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क के 112वें और पहले मुस्लिम मेयर के रूप में शपथ ली। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उनकी पत्नी रामा दुवाजी के हाथों में मौजूद उन दो क़ुरानों की रही, जिन पर हाथ रखकर ममदानी ने शपथ ली।

- दादा का क़ुरान (निजी विरासत): पहला क़ुरान उनके परिवार की विरासत है, जो उनके दादा का था। यह उनकी जड़ों, धार्मिक आस्था और परिवार के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।
- आर्तुरो शॉमबर्ग का क़ुरान (सार्वजनिक इतिहास): दूसरा क़ुरान न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के ‘शॉमबर्ग सेंटर फॉर रिसर्च इन ब्लैक कल्चर’ से लिया गया था। यह 18वीं या 19वीं शताब्दी का एक छोटा क़ुरान है, जो मशहूर अश्वेत इतिहासकार आर्तुरो शॉमबर्ग के निजी संग्रह का हिस्सा था।
शॉमबर्ग के क़ुरान का महत्व: आर्तुरो शॉमबर्ग मुस्लिम नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी लाइब्रेरी में इस क़ुरान को इसलिए रखा था ताकि वह दुनिया को बता सकें कि अश्वेत संस्कृति और इतिहास में इस्लाम का कितना गहरा प्रभाव रहा है। मेयर ममदानी ने इसे चुनकर न्यूयॉर्क की विविधता, समावेशी संस्कृति और नागरिक अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है।
अनोखी जगह पर पहली शपथ: ज़ोहरान ममदानी ने अपना पहला शपथ ग्रहण समारोह किसी आलीशान हॉल में नहीं, बल्कि 1945 से बंद पड़े पुराने सिटी हॉल सबवे स्टेशन में आयोजित किया। ममदानी के मुताबिक, यह जगह उन मजदूरों के सम्मान का प्रतीक है जो दिन-रात काम करके इस शहर को चलाते हैं।
सार्वजनिक समारोह में तीसरा क़ुरान: प्रवक्ता के अनुसार, दिन में होने वाले दूसरे सार्वजनिक समारोह में मेयर ममदानी अपने दादा की धार्मिक पुस्तक के साथ-साथ एक अन्य पारिवारिक (दादी का) क़ुरान का भी इस्तेमाल करेंगे। इस तरह वे अपने पूरे कार्यकाल की शुरुआत अपनी धार्मिक और पारिवारिक पहचान को गर्व से पेश करते हुए कर रहे हैं।








