संभल में ‘इंसाफ’ वाले सीजेएम के तबादले पर बवाल; वकीलों ने घेरा कोर्ट परिसर, अखिलेश यादव बोले— “न्यायपालिका की स्वतंत्रता का हनन लोकतंत्र का अंत”

तारिक खान 

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल में पुलिसकर्मियों पर मुकदमे का आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर के अचानक हुए तबादले ने जिले में कानूनी और राजनीतिक भूचाल ला दिया है। बुधवार को संभल जिला न्यायालय परिसर में वकीलों ने जोरदार प्रदर्शन किया और ‘सीजेएम साहब को वापस लाओ’ के नारे लगाए। वकीलों का आरोप है कि यह तबादला पुलिस प्रशासन के दबाव में किया गया है।

वकीलों का आक्रोश: “पुलिस के दबाव में हुआ ट्रांसफर” प्रदर्शनकारी वकीलों के समूह का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता रोहन सिंह यादव ने कहा:

“सीजेएम साहब एक न्यायप्रिय अधिकारी हैं जो सबको समान दृष्टि से देखते हैं। उनके तबादले की खबर से आम जनता में यह संदेश गया है कि पुलिस प्रशासन के दबाव में यह फैसला लिया गया है। हम चाहते हैं कि माननीय हाई कोर्ट इस तबादले को तुरंत रोके।”

वकील राजेश कुमार यादव के मुताबिक, लगभग सौ से अधिक अधिवक्ताओं ने इस प्रदर्शन में भाग लिया। युवा वकीलों ने मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इसे ‘तानाशाही’ करार दिया।

अखिलेश यादव का बड़ा हमला: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। फेसबुक पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा:

“सत्य स्थानांतरित नहीं होता, उसका स्थान अचल है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता का हनन सीधे-सीधे लोकतंत्र का हनन है। स्वतंत्र न्यायपालिका ही संविधान की सुरक्षा कर सकती है।”

बता दें कि 13 जनवरी को इसी सीजेएम कोर्ट ने संभल हिंसा और फर्जी एनकाउंटर मामले में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत कई पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का ऐतिहासिक आदेश दिया था। अखिलेश यादव ने पहले भी कहा था कि “अब अनुज चौधरी को बचाने कोई नहीं आएगा।”

प्रशासनिक प्रक्रिया या दंडात्मक कार्रवाई? हालांकि, उत्तर प्रदेश के एक पूर्व डीजीपी ने इस तबादले को एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है, लेकिन संभल के वकीलों का तर्क है कि ‘असमय’ किया गया यह तबादला उन अधिकारियों के मनोबल को तोड़ेगा जो निडर होकर न्याय करते हैं। वकीलों ने स्पष्ट किया कि यद्यपि तबादले का आदेश हाई कोर्ट से आया है, लेकिन वे इसके पीछे के ‘अदृश्य दबाव’ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

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