सवाई माधोपुर: स्कूल में ‘मटन’ पक रहा था या ‘आलू-गोभी’? सस्पेंड हेडमास्टर और कुक के दावों पर वायरल वीडियो ने उठाए सवाल; ग्रामीणों ने कहा— “नशे में थे गुरुजी”

तारिक खान 

डेस्क: राजस्थान के गंगापुर सिटी स्थित ‘तालाब की ढाणी’ के सरकारी स्कूल में मचे बवाल ने शिक्षा विभाग की नींद उड़ा दी है। मामला स्कूल परिसर में कथित तौर पर नॉनवेज (मटन) पकवाने और बच्चों को समय से पहले छुट्टी देने का है। हालांकि प्रशासन ने हेडमास्टर को सस्पेंड कर दिया है, लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बीच विरोधाभास ने मामले को और उलझा दिया है।

ग्रामीणों का ‘दीवार फांद’ एक्शन: 12 जनवरी को स्थानीय ग्रामीणों को शक हुआ कि हेडमास्टर अमर सिंह मीणा ने स्कूल का गेट अंदर से बंद कर लिया है और बच्चों को घर भेज दिया है। ग्रामीण जब दीवार फांदकर अंदर घुसे, तो उन्होंने देखा कि हेडमास्टर धूप में बैठे थे और कथित तौर पर नशे की हालत में थे। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के किचन में ‘मटन और टिक्के’ पकाए जा रहे थे।

जांच कमेटी की रिपोर्ट में ‘ट्विस्ट’: मामला गरम होने पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) देवीलाल मीणा ने हेडमास्टर को तुरंत सस्पेंड कर दिया और तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की।

  • कमेटी की रिपोर्ट: मंगलवार (13 जनवरी) को जब कमेटी स्कूल पहुँची, तो उन्हें किचन में केवल आलू और फूलगोभी की सब्जी मिली।
  • कुक का बयान: कुक इंद्रराज ने कमेटी को बताया कि उसने केवल वेज खाना ही बनाया था।

वायरल वीडियो ने खोली पोल? भले ही जांच अधिकारियों को मौके पर आलू-गोभी मिली हो, लेकिन इंटरनेट पर वायरल हो रहे स्कूल के कथित वीडियो ने कहानी पलट दी है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि किचन के पतीले में मटन (नॉनवेज) पक रहा है, जो किसी भी सूरत में आलू-गोभी की करी नहीं लग रही। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या अधिकारियों के पहुँचने से पहले सबूत मिटा दिए गए?

हेडमास्टर की सफाई और ग्रामीणों का आक्रोश: निलंबित हेडमास्टर अमर सिंह मीणा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गांव में रामलीला के कारण बच्चे खाना खाने बाहर गए थे और उन्हें नहीं पता कि किचन में क्या बन रहा था। वहीं ग्रामीण सीताराम गुर्जर ने कहा:

“टीचर समाज का आईना होते हैं। अगर वे ही स्कूल में शराब और कबाब का दौर चलाएंगे, तो बच्चों को क्या संस्कार मिलेंगे? हम उन्हें नौकरी से निकालने की मांग करते हैं।”

जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग वायरल वीडियो को साक्ष्य (Evidence) मानता है या केवल ‘आलू-गोभी’ वाली थ्योरी पर भरोसा कर मामले को रफा-दफा किया जाता है।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *