‘इतिहास में पहली बार बिना स्नान किए मेला छोड़ रहे शंकराचार्य’; अविमुक्तेश्वरानंद के जाने पर छिड़ा सियासी संग्राम, अखिलेश का भाजपा पर वार और सीएम योगी का ‘कालनेमि’ वाला कटाक्ष
प्रयागराज: इतिहास में पहली बार! बिना स्नान किए माघ मेला छोड़कर गए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद। अखिलेश यादव ने भाजपा को घेरा, तो सीएम योगी ने 'कालनेमि' वाले बयान से साधा निशाना। जानें 18 जनवरी से अब तक क्या-क्या हुआ।

आदिल अहमद
प्रयागराज: तीर्थराज प्रयाग में चल रहा माघ मेला इस वर्ष भक्ति के साथ-साथ एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है। उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आज 28 जनवरी को घोषणा की कि वे बेहद दुखी मन से बिना स्नान किए माघ मेला छोड़कर जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी शंकराचार्य को इस तरह मेला छोड़ना पड़ा हो।

- प्रशासन का पक्ष: मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल के अनुसार, भारी भीड़ और कोहरे के कारण रथ को सुरक्षा कारणों से रोका गया था और शंकराचार्य से पालकी या पैदल जाने का अनुरोध किया गया था।
- शंकराचार्य का आरोप: स्वामी जी ने पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया और उन पुलिसकर्मियों की तस्वीरें दिखाईं जिन्होंने कथित तौर पर उनके साथ अभद्रता की। इसके बाद मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर न केवल सुरक्षा उल्लंघन का आरोप लगाया, बल्कि उनकी ‘शंकराचार्य’ उपाधि पर भी सवाल उठा दिए, जिससे आग में घी का काम हुआ।

“अगर कोई अधिकारी शंकराचार्य से उनका प्रमाण पत्र मांगता है, तो यह सनातन धर्म का सबसे बड़ा अपमान है। हम संतों का अपमान करने वाली सरकार के खिलाफ खड़े होंगे।”
हैरान करने वाली बात यह रही कि भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने भी प्रशासन को मर्यादा लांघने की नसीहत दी और कहा कि शंकराचार्य की पदवी जांचने का अधिकार प्रशासन को नहीं, केवल विद्वत परिषद को है।
सीएम योगी का ‘कालनेमि’ वाला प्रहार इस पूरे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरियाणा के सोनीपत में एक बड़ा बयान दिया। किसी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा:
“ऐसे तमाम ‘कालनेमि’ होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमज़ोर करने की साजिश रच रहे होंगे। हमें उनसे सावधान और सतर्क रहना होगा।”
योगी के इस बयान को सीधे तौर पर इस विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालाँकि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नरम रुख अपनाते हुए शंकराचार्य से धरना खत्म कर स्नान करने की अपील की थी, जिसे स्वामी जी ने ठुकरा दिया।
राजनीतिक जमावड़ा: 27 जनवरी को गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला और कंप्यूटर बाबा ने भी शंकराचार्य से मुलाकात कर अपना समर्थन जताया। अब शंकराचार्य के मेला छोड़ने के बाद यूपी की राजनीति में ‘हिंदुत्व’ और ‘संतों के सम्मान’ को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।










