मणिकर्णिका घाट पर सियासी रार: वाराणसी में सपा नेताओं की धरपकड़; सांसद वीरेंद्र सिंह को रोका, नेता लालू यादव नजरबंद; पुलिस के साथ हुई तीखी धक्का-मुक्की

शफी उस्मानी
वाराणसी: महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर रानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को कथित तौर पर खंडित किए जाने का मामला अब एक बड़े राजनीतिक संघर्ष में बदल गया है। रविवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रस्तावित मणिकर्णिका दौरे को रोकने के लिए वाराणसी पुलिस ने भारी घेराबंदी की। इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जमकर नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई।

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लालू यादव का बयान: “यह सरकार सनातन विरोधी हो गई है। हमारी आस्था के केंद्र अहिल्याबाई की मूर्ति को तहस-नहस कर दिया गया और अब हमें विरोध भी नहीं करने दिया जा रहा। हम चुप नहीं बैठेंगे।”
सड़क पर बैठे सांसद वीरेंद्र सिंह: चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह को कैंट पुलिस ने उनके अर्दली बाजार स्थित आवास पर ही रोक दिया। एसीपी कैंट नितिन तनेजा के नेतृत्व में भारी फोर्स ने उन्हें घर से बाहर निकलने से मना किया, जिसके विरोध में सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।
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सांसद का कटाक्ष: “भाजपा इस मामले में भ्रम फैला रही है। आज ये कह रहे हैं कि मूर्ति खंडित होने का वीडियो AI से बना है, कल ये कह देंगे कि पूरी काशी ही AI से बनी है। हम केवल मौके का निरीक्षण करना चाहते हैं, आखिर प्रशासन हमें क्यों रोक रहा है?”
सपा की मांग: निरीक्षण की मिले अनुमति पूर्व मंत्री और सपा नेता सुरेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि अगर सरकार ने कुछ गलत नहीं किया है, तो सपा के प्रतिनिधिमंडल को मौके पर जाने से क्यों रोका जा रहा है? पार्टी की मांग है कि उन्हें पारदर्शी तरीके से घाट पर चल रहे कार्यों और मूर्ति की स्थिति का मुआयना करने दिया जाए।
मणिकर्णिका घाट की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस का कड़ा पहरा है। संदिग्ध रूप से घाट की ओर बढ़ने वाले कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। प्रशासन का तर्क है कि कानून-व्यवस्था और निर्माण कार्य की सुरक्षा के मद्देनजर राजनीतिक दलों के प्रवेश पर पाबंदी लगाई गई है।











