वाराणसी पुलिस का ‘अनोखा’ क्राइम कंट्रोल फॉर्मूला: मुकदमा दर्ज न करो तो कागजों में कम हो जाएगा अपराध; चौबेपुर में चोरी की शिकायत लेकर भटक रही युवती

वाराणसी पुलिस का नया 'क्राइम कंट्रोल' फॉर्मूला: FIR ही दर्ज मत करो, क्राइम ग्राफ खुद नीचे गिर जाएगा! चौबेपुर के बरियासनपुर में 26 जनवरी को हुई चोरी की रिपोर्ट 6 दिन बाद भी दर्ज नहीं। आखिर किसके दबाव में है पुलिस? पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

शफी उस्मानी

वाराणसी: प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पुलिस कमिश्नरेट का एक ‘नया’ फॉर्मूला चर्चा में है— “न रहेगा मुकदमा, न बढ़ेगा क्राइम ग्राफ”। मामला चौबेपुर थाना क्षेत्र के बरियासनपुर गाँव का है, जहाँ पुलिस की सुस्ती और एफआईआर (FIR) दर्ज न करने की जिद ने पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला? बरियासनपुर गाँव स्थित डॉ. शशिकांत पीजी कॉलेज के बगीचे की देखरेख मधुबाला नामक एक युवती करती है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, 25/26 जनवरी की रात कुछ नामजद और अज्ञात बदमाश बगीचे में घुस आए। चोरों ने वहां से सबमर्सिबल का स्टार्टर, स्टेब्लाइजर और अन्य कीमती सामान पार कर दिया।

6 दिन बीते, पर नहीं दर्ज हुई FIR पीड़िता ने 26 जनवरी की सुबह ही स्थानीय पुलिस चौकी को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन चौकी इंचार्ज ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। थक-हारकर तीन दिन पहले थाना प्रभारी चौबेपुर से भी गुहार लगाई गई, लेकिन 72 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस एफआईआर दर्ज करने की जहमत नहीं उठा सकी है।

बिना FIR कैसे होगी गिरफ्तारी? थानेदार का अजीब तर्क जब PNN24 News ने इस संबंध में थाना प्रभारी से बात की, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा— “शिकायती पत्र जाँच हेतु चौकी इंचार्ज को भेजा जा चुका है, अभियुक्तों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।” सवाल यह है कि:

  1. बिना एफआईआर दर्ज किए पुलिस अभियुक्तों को किस कानून के तहत पकड़ेगी?
  2. क्या बिना मुकदमा दर्ज किए उनकी गिरफ्तारी कानूनी रूप से वैध होगी?
  3. आखिर गंभीर शिकायत मिलने के बाद भी ‘मुकदमा’ दर्ज करने में क्या अड़चन है?

एक रात, तीन चोरियां और पुलिस की चुप्पी! विश्वस्त सूत्रों की मानें तो उक्त गिरोह ने उस रात सिर्फ एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग जगहों पर हाथ साफ किया था। मगर पुलिस रिकॉर्ड में एक भी मामला दर्ज नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस कमिश्नरेट का क्राइम ग्राफ नीचे दिखाने के लिए छोटे और मध्यम अपराधों को रजिस्टर ही नहीं किया जा रहा है।

क्या वाराणसी पुलिस कागजों पर अपराध कम दिखाने के चक्कर में अपराधियों के हौसले बुलंद कर रही है? अगर एक कामकाजी महिला को न्याय के लिए एक हफ्ते तक भटकना पड़ रहा है, तो ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का दावा केवल छलावा है।

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