‘शंकराचार्य’ विवाद में कूदे अखिलेश यादव: बोले— “सदन में दर्ज हो गई सीएम की अभद्र भाषा, यह शाब्दिक हिंसा और पाप है”
शंकराचार्य पद की मर्यादा को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। जहाँ एक ओर भाजपा इसे 'कानून और शुचिता' का मामला बता रही है, वहीं अखिलेश यादव इसे 'सनातन अपमान और अहंकारी सत्ता' के रूप में पेश कर रहे हैं।

तारिक खान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा में शंकराचार्य पद को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के बयान को ‘घोर अपमानजनक’ और ‘अभद्र’ बताते हुए उन पर सीधा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने इसे केवल एक बयान नहीं, बल्कि ‘शाब्दिक हिंसा’ करार दिया है।

“जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है तो यही होता है। अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है। शंकराचार्य जी पर दिया गया यह अभद्र बयान सदन की कार्यवाही में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है, जो बेहद निंदनीय है।”
मेज थपथपाने वालों को भी घेरा अखिलेश यादव ने न केवल मुख्यमंत्री बल्कि सत्ता पक्ष के उन विधायकों पर भी निशाना साधा जिन्होंने भाषण के दौरान मेजें थपथपाई थीं। उन्होंने कहा कि अपमानजनक अपशब्द बोलने वालों के साथ-साथ चापलूसी में मेजें थपथपाने वालों को भी बराबर का पाप लगेगा।
महाकुंभ और भ्रष्टाचार के आरोपों से घेराबंदी पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री की ‘नैतिकता’ पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए:
- महाकुंभ का डेटा: अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार महाकुंभ में हुई मौतों के सच्चे आंकड़े छिपा रही है।
- मुआवजा घोटाला: उन्होंने कहा कि कैश में मुआवजा देकर भ्रष्टाचार का रास्ता निकाला गया और कई पीड़ितों तक पैसा पहुंचा ही नहीं।
- खुद के मुकदमे: अखिलेश ने फिर से याद दिलाया कि जो व्यक्ति अपने ऊपर लगे मुकदमे खुद ही हटवा लेता है, उसे किसी दूसरे के ‘धर्म-पद’ पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
क्या था सीएम योगी का बयान? शुक्रवार को विधानसभा में प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच हुए विवाद पर बोलते हुए सीएम योगी ने कहा था कि कानून का शासन सबके लिए बराबर है और कोई भी आचार्य के रूप में कहीं का वातावरण खराब नहीं कर सकता। उन्होंने पद की योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि हर कोई शंकराचार्य नहीं बन सकता।










