ईरान से तनातनी के बीच ट्रंप का बड़ा फैसला: मध्य-पूर्व रवाना हुआ दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत ‘USS जेराल्ड आर फ़ोर्ड’; क्या सत्ता परिवर्तन की तैयारी में है अमेरिका?
मध्य-पूर्व में युद्ध की आहट? राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत 'यूएसएस जेराल्ड आर फ़ोर्ड' को ईरान की ओर रवाना होने का आदेश दिया। ट्रंप का बड़ा बयान— "ईरान में सत्ता परिवर्तन सबसे अच्छी चीज होगी।"

आफताब फारुकी
वाशिंगटन/तेहरान: मध्य-पूर्व के क्षेत्र में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली और सबसे बड़े विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर फ़ोर्ड (USS Gerald R. Ford) को मध्य-पूर्व क्षेत्र में तैनात होने का आधिकारिक आदेश दे दिया है। ट्रंप के इस फैसले को ईरान के प्रति अमेरिका के सख्त सैन्य रुख और ‘सत्ता परिवर्तन’ की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

कैरेबियन सागर से मध्य-पूर्व का रुख बीबीसी फ़ारसी और एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस विशाल युद्धपोत को कैरेबियन सागर से अपनी स्थिति बदलकर तुरंत मध्य-पूर्व पहुंचने को कहा गया है। यह पोत वहां पहले से मौजूद ‘अब्राहम लिंकन’ विमानवाहक पोत और उसके टास्क फोर्स के साथ जुड़ेगा। दो महाशक्तिशाली विमानवाहक पोतों की एक साथ मौजूदगी इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।
कितना शक्तिशाली है ‘यूएसएस जेराल्ड आर फ़ोर्ड’? यह विमानवाहक पोत तकनीकी रूप से दुनिया का सबसे एडवांस युद्धपोत माना जाता है। इसकी मारक क्षमता का अंदाजा इन बिंदुओं से लगाया जा सकता है:
- परमाणु शक्ति: यह दो ए1बी परमाणु रिएक्टरों से लैस है, जो इसे असीमित रेंज और तेज गति प्रदान करते हैं।
- लड़ाकू बेड़ा: इसमें एक साथ 75 से अधिक लड़ाकू विमान तैनात रह सकते हैं, जिनमें एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट (F/A-18 Super Hornet) और ई-2 हॉकआई (E-2 Hawkeye) जैसे अत्याधुनिक विमान शामिल हैं।
- रडार प्रणाली: इसमें हवाई यातायात नियंत्रण और नेविगेशन के लिए दुनिया के सबसे एडवांस्ड रडार सिस्टम मौजूद हैं, जो दुश्मन की किसी भी हरकत को मीलों दूर से पकड़ सकते हैं।
ट्रंप के इस आदेश ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। जहाँ अमेरिका इसे ‘सुरक्षा’ और ‘शांति बहाली’ का नाम दे रहा है, वहीं रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी सैन्य तैनाती का मतलब सीधे तौर पर ईरान को सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहने की चेतावनी देना है।










