बलिया: युवती के कथित अपहरण मामले में उभांव पुलिस पर गंभीर आरोप; बरामदगी के बजाय बेगुनाह युवकों से ‘धन उगाही’ और ‘मानसिक उत्पीड़न’ की चर्चा
बलिया: उभांव थाना क्षेत्र में युवती के अपहरण के बाद पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल। ग्रामीणों का आरोप— "बेगुनाह युवकों को थाने बुलाकर धन उगाही और मानसिक प्रताड़ना दे रही है पुलिस।" भाजपा शासन में पुलिसिया रौब पर बवाल।

उमेश गुप्ता
बिल्थरारोड (बलिया): उभांव थाना क्षेत्र के एक गांव से 20 वर्षीय युवती के कथित अपहरण के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। एक तरफ जहाँ पुलिस ने युवती की मां की तहरीर पर दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही सवालिया निशान लग गए हैं। गांव के युवाओं ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘धन उगाही’ का जरिया बनाने की बात कही है।

पुलिस की कार्यशैली पर ‘धनबल’ और ‘धमकी’ के आरोप मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस युवती की तलाश में जुटी है, लेकिन गांव के कुछ युवकों ने पुलिस पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। युवकों का कहना है कि:
- पुलिस बिना किसी ठोस आधार के उन्हें थाने बुलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है।
- आरोप है कि पुलिस उनसे पैसे (धन उगाही) की मांग कर रही है और पैसे न देने पर मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही है।
- एक युवक ने मीडिया को बताया, “मेरा न तो आरोपियों से कोई लेना-देना है और न ही प्राथमिकी में मेरा नाम है, फिर भी पुलिस मुझ पर युवती को बरामद करने का नाजायज दबाव बना रही है।”
भाजपा शासन को कटघरे में खड़ा कर रही पुलिस? ग्रामीणों के बीच इस बात की खासी चर्चा है कि युवती बालिग है और सच्चाई उसके बयान के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में पुलिस द्वारा युवती की तलाश के बजाय अन्य ग्रामीणों को परेशान करना न्यायसंगत नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस का यह रवैया प्रदेश की भाजपा सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ और सुशासन के दावों को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
निष्पक्ष जांच की मांग क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने मांग की है कि युवती की शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित हो ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके, साथ ही निर्दोषों को अनावश्यक प्रताड़ना से बचाया जाए। फिलहाल, उभांव पुलिस मामले की जांच जारी रखने की बात कह रही है।











