राजस्थान में ‘खेजड़ी’ बचाने के लिए फिर ‘खेजड़ली’ जैसा संकल्प: सौर ऊर्जा प्लांट्स के खिलाफ बीकानेर में महापड़ाव; मुख्यमंत्री ने किया कानून बनाने का वादा

बीकानेर: "सिर सांटे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण!" सौर ऊर्जा के नाम पर खेजड़ी की कटाई के खिलाफ बीकानेर में जन-सैलाब। 500 लोगों का अनशन, सीएम की कानून बनाने की घोषणा, लेकिन आंदोलनकारी लिखित आश्वासन पर अड़े। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

आफताब फारुकी 

बीकानेर: पश्चिमी राजस्थान की मरुस्थलीय संस्कृति और जीवन व्यवस्था की रीढ़ ‘खेजड़ी’ को बचाने के लिए एक बार फिर बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने हुंकार भरी है। बीकानेर में पिछले कई दिनों से जारी 500 लोगों का आमरण अनशन भले ही सरकारी आश्वासन के बाद टूट गया हो, लेकिन ‘महापड़ाव’ अभी भी जारी है। आंदोलनकारियों की एक ही मांग है— “पूरे राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध का लिखित आदेश।”

विकास या विनाश? सौर ऊर्जा की ‘काली चादर’ का सच ग्रीन एनर्जी (Green Energy) के नाम पर बीकानेर, बाड़मेर, फलोदी और जैसलमेर में लाखों खेजड़ी के पेड़ काटे जा रहे हैं। बीकानेर-जयपुर हाईवे पर अब हरियाली की जगह सोलर प्लेटों की ‘काली चादर’ नजर आती है। महंत स्वामी सच्चिदानंद आचार्य ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा:

“एक तरफ ‘एक पेड़ मां के नाम’ का अभियान चल रहा है, दूसरी तरफ हमारे पूर्वजों द्वारा लगाए गए सैकड़ों साल पुराने पेड़ सोलर प्लांट्स के लिए शहीद किए जा रहे हैं।”

पर्यावरण और जैव विविधता पर गंभीर खतरा विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने इस अंधाधुंध कटाई के विनाशकारी परिणामों की चेतावनी दी है:

  • तापमान में वृद्धि: शोध बताते हैं कि जहाँ सोलर प्लांट लगे हैं, वहां का तापमान सामान्य से 2 डिग्री अधिक है।
  • विलुप्त होते पक्षी: बिजली की खुली तारों और पेड़ों की कमी से ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ और अन्य प्रवासी पक्षी मर रहे हैं।
  • जल संकट: 80% पारंपरिक जल स्रोत (नाड़ी, पोखर) सूख चुके हैं क्योंकि प्लेट्स साफ करने के लिए जमीन से पानी खींचा जा रहा है।

अमृता देवी बिश्नोई की विरासत: “सिर कटा देंगे, पेड़ नहीं” 1730 में जोधपुर के खेजड़ली गांव में 363 लोगों ने पेड़ों के लिए जान दी थी। आज वही जज्बा बीकानेर की सड़कों पर दिख रहा है। अनशनकारी इंद्रा बिश्नोई और परसराम बिश्नोई का कहना है कि वे 296 साल पुराने उस इतिहास को दोहराने के लिए तैयार हैं, लेकिन अपने ‘राज्य वृक्ष’ को घास की तरह कटते नहीं देख सकते।

मुख्यमंत्री की घोषणा और आंदोलनकारियों का रुख आंदोलन के चौथे दिन मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने विधानसभा में ‘खेजड़ी संरक्षण कानून’ लाने की घोषणा की। हालांकि, आंदोलनकारी केवल मौखिक घोषणा से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक पूरे प्रदेश के लिए लिखित सर्कुलर जारी नहीं होता, महापड़ाव खत्म नहीं होगा।

क्या हैं विकल्प? विशेषज्ञों का सुझाव है कि पेड़ काटने के बजाय:

  1. नहरों के ऊपर (Canal Top): 1700 किमी लंबी इंदिरा गांधी नहर के ऊपर सोलर प्लेट्स लगाई जाएं। इससे पानी का वाष्पीकरण भी रुकेगा।
  2. राजकीय भवन: सरकारी इमारतों की छतों और रेलवे लाइनों के किनारे सोलर पिलर लगाए जाएं।

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