‘शंकराचार्य’ पद पर सियासी संग्राम: योगी के बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार; बोले— “मुख्यमंत्री बनते ही खुद के 40 मुकदमे हटवाना कैसा कानून का पालन?”

लखनऊ: शंकराचार्य पद को लेकर सीएम योगी और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच ठनी! अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम के मुकदमों पर उठाए सवाल, बोले— "कानून का पालन करते हैं तो 45 केस का कोर्ट में सामना करिए।"

शफी उस्मानी

वाराणसी: उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शंकराचार्य पद और कानून के शासन को लेकर दिए गए बयान ने एक नया धार्मिक और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री के दावों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उनकी घेरेबंदी की है।

विधानसभा में क्या बोले थे सीएम योगी? शुक्रवार को सदन में विपक्ष पर हमला बोलते हुए सीएम योगी ने कहा था कि ‘हर कोई शंकराचार्य नहीं बन सकता’। उन्होंने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा था कि कोई भी व्यक्ति किसी पीठ के आचार्य के रूप में कहीं भी वातावरण खराब नहीं कर सकता। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए पूछा था कि अगर वह शंकराचार्य थे तो वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों की गई थी?

अविमुक्तेश्वरानंद का सीधा प्रहार: “मुकदमों का सामना करें योगी” शनिवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी के ‘कानून के पालन’ वाले बयान पर सवाल उठाते हुए कहा:

“योगी आदित्यनाथ के ऊपर 40 से ज्यादा मुकदमे थे और मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने अपने ऊपर से सभी मुकदमे हटवा लिए। यह कैसा कानून का पालन है? क्या कानून में लिखा है कि बड़े पद पर पहुंचते ही केस खत्म हो जाएंगे? अगर आप वाकई कानून मानने वाले हैं, तो उन 45 मुकदमों का कोर्ट में सामना करिए।”

वाराणसी लाठीचार्ज पर स्पष्टीकरण सपा सरकार के दौरान हुए लाठीचार्ज के जिक्र पर स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि उस समय वे शंकराचार्य के पद पर आसीन नहीं थे। उन्होंने कहा: “अगर समाजवादी पार्टी ने उस समय लाठी मारी तो वह गलत था, लेकिन वही काम आज आप (योगी सरकार) कर रहे हैं, तो आप सही कैसे हुए? अगर सपा गलत थी, तो योगी आदित्यनाथ भी गलत हैं।”

विवाद की जड़ यह विवाद तब से गहराया हुआ है जबसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कुछ धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार के फैसलों की आलोचना की है। वहीं, सरकार की ओर से उनके शंकराचार्य पद की वैधता और उनके द्वारा आयोजित कार्यक्रमों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

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