वोटर लिस्ट से ‘मुस्लिमों’ के नाम काटने का दबाव, मना करने पर BLO को बीच सड़क पीटा; मोबाइल तोड़ा और दस्तावेज छीने, भाजपा नेताओं पर गंभीर आरोप

इटावा: वोटर लिस्ट से मुस्लिमों के नाम काटने से मना करने पर BLO की बेरहमी से पिटाई! बीजेपी पदाधिकारी पर सरकारी दस्तावेज छीनने और मोबाइल तोड़ने का आरोप। चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के बीच यूपी में बढ़ा तनाव। पढ़ें PNN24 की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।

मो0 सलीम 

इटावा: उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मचा घमासान अब हिंसक मोड़ ले चुका है। इटावा जिले में एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के साथ मारपीट, सरकारी दस्तावेजों की लूट और जान से मारने की धमकी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक सत्ताधारी दल के नेता ने अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से जबरन हटाने के लिए दबाव बनाया और इनकार करने पर खूनी खेल खेला।

ड्यूटी से लौट रहे शिक्षक पर हमला पीड़ित अश्विनी कुमार बकेवर थाना क्षेत्र के महेवा मड़ैया अहिरान के निवासी हैं और चौबिया रम्पुरा स्थित प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं। वर्तमान में उनकी ड्यूटी एसआईआर (SIR) के तहत बूथ संख्या 323 मूंज में बीएलओ के रूप में लगी है। मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे जब अश्विनी निर्वाचन आयोग के नोटिस बांटकर बाइक से लौट रहे थे, तभी एक कार ने उनका रास्ता रोक लिया।

“मुस्लिमों के नाम काटो वरना…” अश्विनी कुमार ने चौबिया थाने में दी गई तहरीर में गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • दबाव: कार सवार व्यक्ति, जो खुद को भाजपा का पदाधिकारी बता रहा था, उसने अश्विनी पर अल्पसंख्यक (मुस्लिम) मतदाताओं के नाम सूची से काटने का दबाव बनाया।
  • हिंसा: जब बीएलओ ने निर्वाचन आयोग के नियमों का हवाला देते हुए अवैध काम से मना किया, तो आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए उनका कॉलर पकड़ लिया और मारपीट शुरू कर दी।
  • लूट: आरोपी ने अश्विनी के बैग में रखे जरूरी सरकारी दस्तावेज, वोटर लिस्ट और नोटिस जबरन छीन लिए।
  • सबूत मिटाने की कोशिश: जब घायल अश्विनी ने अधिकारियों को फोन करने की कोशिश की, तो उनका मोबाइल छीनकर जमीन पर पटक कर तोड़ दिया गया।

पुलिसिया कार्रवाई और हकीकत घटना के बाद घायल अश्विनी कुमार ने थाने पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं, पुलिस का कहना है कि मामला हाई-प्रोफाइल होने के कारण दोनों पक्षों की ओर से तहरीर मिली है और जांच की जा रही है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी कर्मचारियों को अब राजनीतिक दबाव में आकर संविधान की धज्जियां उड़ानी होंगी?

इटावा की यह घटना उस समय हुई है जब संसद में कमल हासन और सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी इसी ‘वोटर लिस्ट’ के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बीएलओ के साथ हुई यह मारपीट दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को ‘बुलडोज’ करने की कोशिशें किस हद तक बढ़ गई हैं।

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