बलिया: ‘वर्दी’ की आड़ में दरिंदगी! शादी का झांसा देकर 8 महीने तक युवती का यौन शोषण करने वाला वन दरोगा गिरफ्तार; DIG के दखल के बाद एक्शन

बलिया: बेल्थरारोड में तैनात वन दरोगा उग्रसेन कुमार पर शादी का झांसा देकर 8 माह तक यौन शोषण का आरोप। डीआईजी और एसपी के हस्तक्षेप के बाद उभांव पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा। आरोपी हिरासत में।

उमेश गुप्ता

बिल्थरा रोड (बलिया): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद से खाकी और रसूख को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। बेल्थरारोड वन विभाग में तैनात एक वन दरोगा पर एक युवती ने शादी का झांसा देकर पिछले 8 महीनों तक शारीरिक और मानसिक शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया है। उच्चाधिकारियों के कड़े निर्देश के बाद उभांव थाना पुलिस ने आरोपी वन दरोगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है।

शादी का वादा और फिर जान से मारने की धमकी पीड़िता के अनुसार, आरोपी वन दरोगा उग्रसेन कुमार ने उससे शादी करने का वादा किया था और इसी भरोसे के सहारे करीब 8 महीने तक उसका यौन शोषण करता रहा। जब युवती ने शादी के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी अपने वादे से मुकर गया और विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी।

DIG और SP के आदेश पर दर्ज हुई FIR हैरानी की बात यह है कि पीड़िता ने बीते 3 फरवरी को ही उभांव थाने में लिखित तहरीर दी थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। न्याय न मिलता देख पीड़िता ने आजमगढ़ रेंज के डीआईजी (DIG) और बलिया के पुलिस अधीक्षक (SP) से गुहार लगाई। उच्चाधिकारियों के संज्ञान लेते ही पुलिस हरकत में आई और तत्काल मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

BNS की गंभीर धाराओं में केस दर्ज उभांव थाना प्रभारी संजय शुक्ला ने बताया कि आरोपी उग्रसेन कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 (शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाना) और धारा 351(3) (जान से मारने की धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

  • वर्तमान स्थिति: आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है।
  • अगली कार्रवाई: पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है और कोर्ट में धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है।

वीडियो वायरल होने पर भी संरक्षण का आरोप पीड़िता ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शुरुआत में आरोपी को स्थानीय स्तर पर संरक्षण दिया गया। शिकायत करने पर उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया और उसे डराया-धमकाया गया। सोशल मीडिया पर पीड़िता का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वह न्याय के लिए रोती हुई नज़र आ रही थी।

सरकारी पद पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस तरह का कृत्य समाज और व्यवस्था के प्रति भरोसे को तोड़ता है। उच्चाधिकारियों के दखल के बाद हुई यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन शुरुआती देरी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

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