‘जीरो ड्यूटी’ का झटका: भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कश्मीर की ‘सेब इकोनॉमी’ पर संकट; क्या उजड़ जाएंगे वादी के बाग?
भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कश्मीर के सेब और ड्राई फ्रूट उद्योग में हड़कंप! जीरो ड्यूटी पर आएंगे अमेरिकी फल। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जताया विरोध, किसानों ने कहा— "यह हमारे अस्तित्व की जंग है।" पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
श्रीनगर: भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया अंतरिम व्यापार समझौते (Trade Deal) ने जम्मू-कश्मीर के किसानों और व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। समझौते के तहत अमेरिका से आने वाले सेब, अखरोट और बादाम (Tree Nuts) पर कस्टम ड्यूटी ‘जीरो’ करने के फैसले को स्थानीय उद्योग एक बड़े आर्थिक प्रहार के तौर पर देख रहा है। कश्मीर की जीडीपी में 7-8 प्रतिशत का योगदान देने वाला यह सेक्टर अब अपने भविष्य को लेकर आशंकित है।

क्या है ट्रेड डील का गणित?
- शून्य सीमा शुल्क: अमेरिका से आने वाले ड्राई फ्रूट्स और सेब पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा।
- बाजार में प्रतिस्पर्धा: कश्मीर फ्रूट ग्रोवर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शहीद लतीफ चौधरी के अनुसार, दिल्ली की मंडियों में अमेरिकी सेब सस्ता होने से कश्मीरी सेब के दाम 40-50% तक गिर सकते हैं।
- रोजगार पर असर: कश्मीर में करीब 7 लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सेब उद्योग से जुड़े हैं।
विधानसभा में गूंजी गूँज: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कड़ा रुख जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में इस डील पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा:
“मैं अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहा हूँ कि यह डील जम्मू-कश्मीर के लिए कहाँ से अच्छी है। आपने अखरोट और बादाम का सौदा तो कर दिया, कम से कम सेब को तो बचा लेते। कहाँ गई आपकी हमदर्दी?”
ड्राई फ्रूट उद्योग: पहले से बीमार, अब और भी लाचार श्रीनगर की मंडी में ड्राई फ्रूट का कारोबार करने वाले फारूक अहमद कहते हैं कि चीन और चिली से आने वाले आयात ने पहले ही बाजार खराब कर रखा था, अब अमेरिका के साथ ‘जीरो ड्यूटी’ डील इस उद्योग के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अखरोट के पेड़ों की कटाई और नए पेड़ न लगने से उत्पादन पहले ही कम है, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है।
सियासी घमासान: इस्तीफे की मांग संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इस डील को सरकार का ‘पूर्ण आत्मसमर्पण’ बताते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग की है। दूसरी ओर, वाणिज्य मंत्रालय और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का दावा है कि समझौते में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा की गई है और संवेदनशील उत्पादों को सुरक्षित रखा गया है।











