कोटद्वार: ‘इंसानियत’ भारी पड़ी ‘व्यापार’ पर? बुजुर्ग को बचाने वाले ‘दीपक’ का जिम हुआ खाली; 150 से घटकर रह गए 15 सदस्य, पर साहस अब भी अडिग
कोटद्वार: इंसानियत की रक्षा की भारी कीमत चुका रहे हैं 'दीपक'। 70 वर्षीय बुजुर्ग को भीड़ से बचाने वाले जिम ट्रेनर का बहिष्कार! 150 सदस्यों वाले जिम में बचे सिर्फ 15 लोग। राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने ली सदस्यता। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
कोटद्वार (उत्तराखंड): “ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है,” यह शब्द हैं कोटद्वार के दीपक कुमार के, जिन्होंने 26 जनवरी को एक 70 वर्षीय बुजुर्ग दुकानदार की गरिमा बचाने के लिए भीड़ के सामने सीना तान दिया था। आज वही दीपक अपने परिवार के भविष्य और आजीविका को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। जिस ‘हल्क जिम’ (Hulk Gym) में कभी 150 युवाओं की भीड़ रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है और सदस्यों की संख्या घटकर मात्र 15 रह गई है।

बहिष्कार और धमकियों का दौर घटना के बाद दीपक के लिए मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती गईं।
- सदस्यों का पलायन: दीपक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जिम का किराया 40,000 रुपये है और घर के लोन की किस्त 16,000 रुपये है। सदस्यों के चले जाने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
- भीड़ का तांडव: 40 से अधिक बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने उनके जिम के बाहर प्रदर्शन किया, गालियां दीं और परिवार को धमकियां दीं।
- पुलिस की भूमिका: आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस तमाशबीन बनी रही। हालांकि, अब तीन अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं और दीपक को सुरक्षा दी गई है।
सांसद जॉन ब्रिटास ने बढ़ाया हाथ दीपक के इस साहस की गूंज दिल्ली तक पहुंची। राज्यसभा सांसद (CPI-M) जॉन ब्रिटास ने कोटद्वार पहुंचकर दीपक और वकील अहमद से मुलाकात की। ब्रिटास ने न केवल दीपक का हौसला बढ़ाया, बल्कि उनके खाली हो चुके जिम की सदस्यता (Membership) भी ली ताकि एक संदेश दिया जा सके कि नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने वालों के साथ देश खड़ा है।
दो हिस्सों में बंटा शहर दीपक कहते हैं कि कोटद्वार आज दो हिस्सों में बंटा नजर आता है। एक तरफ वो लोग हैं जो उनके काम की सराहना कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ वो जो डर या नाराजगी के कारण उनसे दूर हो गए हैं। बावजूद इसके, दीपक को अपने किए पर पछतावा नहीं है। वे कहते हैं, “बाहर से समर्थन मिल रहा है, शहर के लोग भी धीरे-धीरे समझेंगे। मुझे भरोसा है कि हालात बदलेंगे।”
दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद दीपक’ की कहानी आज के दौर का सबसे बड़ा आईना है। यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हमारे समाज में किसी मज़लूम की जान और सम्मान बचाना अब ‘अपराध’ की श्रेणी में आता जा रहा है? दीपक का खाली जिम हमारी सामूहिक चेतना के लिए एक बड़ा सवालिया निशान है।











