MLC चुनाव: टिकट का पता नहीं, पर ‘गुरु’ का भौकाल टाइट है! हत्या के आरोपी महादेव पीजी कालेज के अजय सिंह ने खुद को घोषित किया BJP प्रत्याशी
वाराणसी में एमएलसी चुनाव से पहले महादेव पीजी कॉलेज के मालिक अजय सिंह ने शहर भर में होर्डिंग लगाकर खुद को भाजपा प्रत्याशी घोषित कर दिया है। हत्या के आरोपों और कॉलेज विवादों के बीच इस 'स्वघोषित' उम्मीदवारी और प्रशासनिक चुप्पी पर एक विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
वाराणसी। उत्तर प्रदेश में एमएलसी (स्नातक निर्वाचन क्षेत्र) के चुनाव की आहट अभी शुरू ही हुई है कि दावेदारों ने शहर की दीवारों और होर्डिंग बोर्ड्स पर अपना कब्जा जमाना शुरू कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि अभी तक किसी भी प्रमुख दल ने अपने आधिकारिक प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है, लेकिन वाराणसी की सड़कों पर एक चेहरा ‘स्वघोषित प्रत्याशी’ बनकर चमक रहा है—नाम है अजय सिंह, महादेव पीजी कॉलेज के मालिक।
नगर निगम की ‘मेहरबानी’ या सत्ता का रसूख?
शहर के संदहा इलाके से लेकर प्रमुख चौराहों तक अजय सिंह की बड़ी-बड़ी होर्डिंग लगी हैं। इन पोस्टरों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सिंबल प्रमुखता से अंकित है और अजय सिंह ने खुद को स्नातक विधानसभा का प्रत्याशी घोषित कर रखा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने गुपचुप तरीके से उन्हें टिकट थमा दिया है? या फिर यह सत्ता पक्ष के सिंबल का इस्तेमाल कर नगर निगम को ठेंगा दिखाने की रणनीति है?
नियमतः बिना अनुमति के होर्डिंग लगाना अपराध है, लेकिन जब पोस्टर पर ‘कमल’ का फूल हो, तो नगर निगम के अफसरों की हिम्मत नहीं होती कि पूछ लें— “भाई साहब, ये होर्डिंग किसकी अनुमति से लगी है?”
विवादों का ‘महादेव’ कनेक्शन
अजय सिंह और उनका महादेव पीजी कॉलेज इन दिनों विवादों के केंद्र में हैं। सूत्रों की मानें तो:
- संबद्धता पर सवाल: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) से इस कॉलेज की संबद्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हैं।
- जमीन का मालिकाना हक: जिस जमीन पर कॉलेज खड़ा है, उसका मालिकाना हक भी फिलहाल अजय सिंह के पास नहीं बताया जा रहा है। कायदे से अब तक संबद्धता रद्द हो जानी चाहिए थी, लेकिन विश्वविद्यालय की ‘विशेष कृपा’ बरकरार है।
हत्या के आरोपी का ‘राजनीतिक कवच’
अजय सिंह का नाम विभूति हत्याकांड में नामजद अभियुक्त के तौर पर दर्ज है और मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। जानकार बताते हैं कि एक विधायक जी के ‘आश्वासन’ के बाद से अजय सिंह अपनी छवि सुधारने और कानूनी शिकंजे से बचने के लिए राजनीति को ढाल बना रहे हैं। आरोप तो यह भी है कि उन्होंने मुख्य गवाहों और वादी पर दबाव बनाने के लिए उन पर चार अलग-अलग FIR तक करवा रखी हैं।
रेस में ‘नीचे से’ नंबर वन!
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अजय सिंह भले ही खुद को नंबर वन प्रत्याशी बता रहे हों, लेकिन टिकट की दौड़ में उनका पायदान ‘नीचे से पहला’ है। फिर भी, एक हजार की फ्लैक्स छपवाकर और सरकारी होर्डिंग बोर्ड्स पर कब्जा जमाकर ‘फ्री की लोकप्रियता’ बटोरने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है।
अब देखना यह है कि क्या भाजपा नेतृत्व ऐसे ‘विवादित’ और ‘स्वघोषित’ चेहरों पर कार्रवाई करेगा, या फिर वाराणसी की सड़कों पर यह ‘होर्डिंग पॉलिटिक्स’ ऐसे ही चलती रहेगी।












