तराई की शुद्ध हवा पर प्रदूषण का ‘कब्जा’: पलिया नगर में धूल और धुएं ने छीना लोगों का चैन; कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रही दुधवा की गोद

फारुख हुसैन
पलिया कलां (खीरी): कभी अपनी शुद्ध हवा, सघन वन और प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व विख्यात ‘दुधवा टाइगर रिजर्व’ की गोद में बसा पलिया और उसका सीमावर्ती क्षेत्र आज प्रदूषण की गंभीर चपेट में है। जिस तराई को ‘प्रकृति का फेफड़ा’ कहा जाता था, वह अब धूल के गुबार और जहरीले धुएं के कारण दम घोंटू बन गया है। शहर की जर्जर सड़कों और हरियाली के विनाश ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

हरियाली पर आरा और कंक्रीट का विस्तार तराई के विनाश के पीछे ‘विकास’ की अंधी दौड़ एक बड़ा कारण है। जहाँ कभी बाग-बगीचे और लहलहाते खेत हुआ करते थे, वहाँ आज अवैध प्लाटिंग का जाल बिछ चुका है। खेतों के अस्तित्व को मिटाकर कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं। पलिया-भीरा मार्ग और स्टेशन रोड की स्थिति सबसे भयावह है, जहाँ धूल के कारण दिन में भी दृश्यता (Visibility) कम हो जाती है।

भविष्य की डरावनी तस्वीर यदि प्रशासन ने अभी ठोस कदम नहीं उठाए, तो वह दिन दूर नहीं जब तराई की ठंडी हवाएं इतिहास बन जाएंगी और यहाँ केवल गर्म लू के थपेड़े व धूल भरी आंधियां चलेंगी। विकास के नाम पर प्रकृति का यह दोहन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर रहा है।











