नफरत के समंदर में ‘एकता’ की मीठी बूंद: राजकोट के जंगलेश्वर में हिंदू-मुस्लिमों ने साथ लड़ी जंग; और शिकस्त खाई सरकार, हाई कोर्ट ने रद्द किया 1358 घरों को ढहाने का नोटिस
राजकोट: 7 हजार जिंदगियों पर मंडराया संकट टला! 'हिंदू-मुस्लिम एकता मंच' ने कानूनी लड़ाई जीत बचाए 1358 आशियाने। गुजरात हाई कोर्ट ने रद्द किया सरकारी नोटिस। जश्न के लिए मंदिर और दरगाह साथ पहुंचे दोनों धर्मों के लोग।

तारिक आज़मी
डेस्क: जब इरादे नेक हों और एकता की नींव मजबूत हो, तो सबसे बड़ी सत्ता को भी कदम पीछे खींचने पड़ते हैं। गुजरात के राजकोट शहर के जंगलेश्वर और आस-पास के इलाकों में रहने वाले 7 हजार से अधिक लोगों के लिए सोमवार का दिन ‘नई जिंदगी’ जैसा रहा। गुजरात हाई कोर्ट ने प्रशासन द्वारा 1358 घरों को खाली करने और गिराने के नोटिस को रद्द कर दिया है।


- साझा कानूनी लड़ाई: कानूनी प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया गया कि एकता बनी रहे। अदालतों में दायर याचिकाओं में जानबूझकर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों को मुख्य याचिकाकर्ता और सह-आवेदक बनाया गया।
- इंसानियत का संदेश: इस मंच की नींव 2001 के भूकंप के समय पड़ी थी, जो आज भी सामाजिक कार्यों और संकट के समय चट्टान की तरह खड़ा है।


आज के दौर में जहां सांप्रदायिक तनाव की खबरें आम हैं, जंगलेश्वर के लोग ‘खारे समुद्र में मीठे पानी की बूंदों’ की तरह हैं। यह जीत केवल 1358 घरों की नहीं, बल्कि उस ‘गंगा-यमुनी तहजीब’ की है जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि साथ मिलकर किसी भी मुश्किल को हराया जा सकता है।










