स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान: “सत्ता के खिलाफ बोलने की मिल रही सज़ा; सार्वजनिक की जाए सीडी, सीसीटीवी में है सारा सच”

पॉक्सो (POCSO) एफआईआर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा पलटवार! कहा— "यह शंकराचार्य संस्था पर हमला है।" सीसीटीवी फुटेज और सीडी सार्वजनिक करने की मांग के साथ सरकार को घेरा।

ईदुल अमीन 

वाराणसी: बाल यौन शोषण (पॉक्सो) के गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज होने के बाद ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को चुप्पी तोड़ी। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने इस पूरी कानूनी कार्रवाई को ‘राजनीतिक साज़िश’ करार देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर सीधा हमला बोला।

“शंकराचार्य संस्था को मिटाने की कोशिश” स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एफआईआर को केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि ‘शंकराचार्य नाम की संस्था पर हमला’ बताया। उन्होंने भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा:

“जो शंकराचार्य सत्ता के साथ सुर में सुर मिलाते हैं, उन्हें हर तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। लेकिन जो लोग जनहित में सवाल पूछते हैं, उन पर झूठे आरोप लगाकर दबाने की कोशिश की जा रही है।”

सीसीटीवी फुटेज और सीडी पर उठाए सवाल यौन शोषण के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए स्वामी जी ने दो प्रमुख तर्क रखे:

  1. सीसीटीवी प्रमाण: उन्होंने कहा कि माघ मेले के दौरान जहाँ वह धरने पर बैठे थे, वहां चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे थे। अगर कोई घटना हुई है, तो वह कैमरों में दर्ज होगी, पुलिस उसे सार्वजनिक क्यों नहीं करती?
  2. सीडी का रहस्य: स्वामी जी ने चुनौती देते हुए कहा, “भ्रम फैलाया जा रहा है कि इस मामले की कोई सीडी मौजूद है। मैं कहता हूँ कि उस सीडी को सार्वजनिक किया जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।”

“उन लड़कों से हमारा कोई संबंध नहीं” स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि जिन नाबालिगों के शोषण की बात कही जा रही है, वे कभी उनके गुरुकुल नहीं आए और न ही कभी वहां पढ़ाई की। उन्होंने सवाल पूछा कि जब उन बच्चों का आश्रम से कोई संबंध ही नहीं है, तो उनके साथ कुछ होना कैसे संभव है?

पूरा मामला क्या है? प्रयागराज की पॉक्सो अदालत के निर्देश पर झूंसी पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और 2-3 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि माघ मेले और महाकुंभ के दौरान नाबालिगों के साथ कुकृत्य किया गया।

इस हाई-प्रोफाइल मामले ने अब धार्मिक बनाम राजनीतिक मोड़ ले लिया है। एक तरफ कोर्ट के निर्देश पर हुई एफआईआर है, तो दूसरी तरफ शंकराचार्य का यह दावा कि उन्हें ‘सवाल पूछने की सजा’ दी जा रही है। जांच की सुई अब उन सीसीटीवी फुटेज और कथित सीडी पर टिकी है, जिसकी मांग खुद स्वामी जी कर रहे हैं।

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