‘ट्रंप के सामने क्यों नतमस्तक हैं मोदी जी?’: रूस से तेल खरीदने की अमेरिकी ‘इजाजत’ पर भड़के केजरीवाल; प्रधानमंत्री से माँगा इस्तीफा

"अमेरिका से इजाजत की जरूरत क्यों?"— रूस से तेल खरीदने के लिए मिली 30 दिन की छूट पर भड़के अरविंद केजरीवाल। पीएम मोदी पर ट्रंप के सामने झुकने का लगाया आरोप, माँगा इस्तीफा। भारत की संप्रभुता पर छिड़ी नई सियासी जंग।

तारिक खान

नई दिल्ली (PNN24 News): रूस-यूक्रेन संकट और ईरान युद्ध के बीच भारत की तेल आपूर्ति को लेकर देश में एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर कड़ा प्रहार करते हुए पूछा है कि भारत जैसे संप्रभु देश को रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका से ‘इजाजत’ लेने की क्या जरूरत है?

1. विवाद की जड़: स्कॉट बेसेंट का ‘X’ पोस्ट

विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट (Waiver) दी है। इस ‘छूट’ शब्द को केजरीवाल ने भारत के आत्मसम्मान पर चोट बताया।

2. “भारत झुका नहीं, आपने झुका दिया”

केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा:

“भारत को रूस से तेल खरीदने की ‘इजाजत देने वाला अमेरिका’ कौन होता है और भारत को अमेरिका से ‘इजाजत की क्यों जरूरत’ है? मोदी जी, आखिर आपकी ऐसी कौन सी मजबूरी है जिसकी वजह से आप ट्रंप के सामने नतमस्तक हैं?”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों में भारत ने हर कदम पर ट्रंप प्रशासन के सामने सरेंडर किया है, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय छवि धूमिल हुई है।

3. इस्तीफे की मांग: “भारतीय हितों के लिए पद छोड़ें”

केजरीवाल ने हमले को और तेज़ करते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री पर ट्रंप का कोई निजी दबाव है, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने लिखा:

“अगर आपकी वाकई कोई ऐसी मजबूरी है जिसका फायदा ट्रंप उठा रहा है, तो भारत और भारतीय हितों की खातिर कृपया इस्तीफा दे दीजिए। आज तक भारत ने किसी भी देश के सामने इस तरह सर नहीं झुकाया।”

4. कूटनीतिक गलियारों में हलचल

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से तेल खरीदना भारत की आर्थिक ज़रूरत है, लेकिन अमेरिका द्वारा दी गई ’30 दिन की समय सीमा’ यह संकेत देती है कि ट्रंप प्रशासन भारत की ऊर्जा नीतियों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। विपक्ष इसी ‘टाइम लिमिट’ को भारत की संप्रभुता पर हमला बता रहा है।

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