‘पगड़ी’ के नाम पर लूटा, अब ‘मुआवजे’ के नाम पर धोखा; दालमंडी के व्यापारियों का दर्द— “बिल्डर अमीर हो गए, हम बर्बाद!” क्या अखिलेश यादव दिलाएंगे इन मजलूमों को इंसाफ?

दालमंडी की तबाही की ज़मीनी हकीकत: बिल्डरों ने वसूली करोड़ों की 'पगड़ी' और अब दुकानदारों को कर रहे बेघर। सपा नेता अस्करी रज़ा उर्फ सईद बिल्डर के वायरल वीडियो ने खोला राज। क्या अखिलेश यादव दिलाएंगे इन मजलूमों को इंसाफ? PNN24 की विशेष पड़ताल।

तारिक आज़मी 

वाराणसी (PNN24 News): काशी की दालमंडी में आज हर गली में एक ही सन्नाटा है— वो सन्नाटा जो तबाही के बाद आता है। यहाँ की दुकानों के ताले केवल सरकारी बुलडोजर नहीं तोड़ रहे, बल्कि वो ‘हाथ’ भी तोड़ रहे हैं जिन्हें यहाँ का व्यापारी अपना हमदर्द समझता था।

1. मुनाफे की मंडी में ‘बेगुनाह’ कुर्बान

दालमंडी चौड़ीकरण योजना (जिसमें सड़क को 17.5 मीटर चौड़ा किया जा रहा है) ने उन दुकानदारों की कमर तोड़ दी है जिन्होंने अपनी पूरी उम्र की जमा-पूंजी इन दुकानों में लगा दी थी।

  • बिल्डरों का खेल: सूत्र बताते हैं कि इलाके के रसूखदार बिल्डरों ने दशकों पहले इन भवनों पर कब्जा किया और फिर भोली-भाली जनता से 25 लाख से 50 लाख रुपये तक की ‘पगड़ी’ लेकर उन्हें दुकानें आवंटित कीं।
  • आपदा में अवसर: अब जब सरकार इन भवनों का अधिग्रहण कर करोड़ों का मुआवजा दे रही है, तो बिल्डर उस मुआवजे को खुद डकारने के लिए दुकानदारों को बेदखल कर रहे हैं।

2. वायरल वीडियो और अस्करी रज़ा (सईद बिल्डर) का सच

आज सुबह सामने आए एक वीडियो ने दालमंडी के व्यापारियों के घावों पर नमक छिड़क दिया है। समाजवादी पार्टी के नेता अस्करी रज़ा उर्फ सईद बिल्डर से जुड़े इस मामले ने सियासी हलकों में हड़कंप मचा दिया है।

  • घटना: सईद बिल्डर के गुर्गे एक दुकान का ताला तोड़ते और शटर काटते कैमरे में कैद हुए। जब दुकानदार ने टोका, तो जवाब मिला— “सईद भाई ने बोला है, ये उनकी दुकान है।” * सवाल: जिस दुकानदार ने लाखों की ‘पगड़ी’ दी, क्या उसकी कोई कीमत नहीं? क्या सपा नेता की पहुँच इतनी ऊपर है कि वह कानून को ताक पर रखकर किसी की रोजी-रोटी छीन सकते हैं?

3. सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से सीधी अपील

दालमंडी के व्यापारी अब पूछ रहे हैं कि अखिलेश यादव जी, आपके नेता ‘विकास की गंगा’ में अपनी तिजोरियां भर रहे हैं और आप न्याय की बात कर रहे हैं?

  • दोगलापन: एक तरफ अस्करी रज़ा जैसे नेता मीडिया पर अपने बयान में कहते हैं कि दुकानदारों को 4-5 लाख का मुआवजा मिलना चाहिए, जबकि वे खुद दुकानदारों से 10 लाख से लेकर 50 लाख की पगड़ी वसूल चुके हैं। क्या पार्टी ऐसे ‘मुनाफाखोरों’ को बाहर का रास्ता दिखाएगी?

4. दुकानदार की बेबसी: “कहाँ जाएँ हम?”

दालमंडी के एक पुराने व्यापारी का कहना है, “हमने अपना घर-बार बेचकर पगड़ी दी थी ताकि पीढ़ी दर पीढ़ी धंधा चले। अब न दुकान रही, न पगड़ी का पैसा वापस मिल रहा है। प्रशासन विकास की बात करता है, पर हमारे बजबजाते सीवर और टूटे सपनों का क्या?”


📌 दालमंडी में जो हो रहा है वह ‘विकास’ कम और ‘व्यापारिक नरसंहार’ ज़्यादा लग रहा है। प्रशासन और सरकार को चाहिए कि मुआवज़े की राशि सीधे उन दुकानदारों को मिले जिन्होंने ‘पगड़ी’ दी है, न कि उन बिल्डरों को जो इस बर्बादी में भी अपना महल खड़ा कर रहे हैं।

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