‘अकेले ही ईरान को संभाल लेगा अमेरिका’; नेटो के पीछे हटने पर ट्रंप का पलटवार— “सहयोगी देश सिर्फ पैसा डकारते हैं, ज़रूरत पर साथ नहीं देते”
"हमें किसी की मदद की ज़रूरत नहीं": नेटो सहयोगियों के इनकार पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप। ईरान की नौसेना और वायुसेना को तबाह करने का दावा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर वैश्विक तनाव चरम पर। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

आदिल अहमद
PNN24 News: ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के 18वें दिन (17 मार्च 2026) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर एक के बाद एक कई विस्फोटक पोस्ट किए। ट्रंप ने नेटो सहयोगियों, जापान और दक्षिण कोरिया को दो-टूक शब्दों में कहा है कि अमेरिका को अब उनकी सैन्य सहायता की कोई इच्छा नहीं है क्योंकि वह अकेले ही ईरान की कमर तोड़ चुका है।
1. नेटो पर ट्रंप का तीखा प्रहार
ट्रंप ने नेटो देशों की “चुप्पी” और “इरकार” पर नाराज़गी जताते हुए कहा:
- एकतरफ़ा रास्ता: ट्रंप ने नेटो को ‘वन-वे स्ट्रीट’ करार दिया। उन्होंने कहा, “हम इन देशों की सुरक्षा पर हर साल सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करते हैं, लेकिन जब ‘आतंकवादी ईरानी शासन’ के खिलाफ कार्रवाई की बात आई, तो वे पीछे हट गए।”
- सच्चाई का सामना: राष्ट्रपति ने दावा किया कि लगभग सभी देश निजी तौर पर मानते हैं कि अमेरिका सही कर रहा है, लेकिन वे युद्ध में शामिल होने का साहस नहीं जुटा पा रहे।
2. “ईरान की सेना अब इतिहास है”
ट्रंप ने युद्ध के मैदान से जो दावे किए हैं, वे चौकाने वाले हैं। उन्होंने कहा:
- सैन्य विनाश: ईरान की नौसेना (Navy) और वायुसेना (Air Force) पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
- रक्षा प्रणाली फेल: उनका एंटी-एयरक्राफ्ट और रडार सिस्टम अब काम नहीं कर रहा है।
- नेतृत्व विहीन: सबसे महत्वपूर्ण दावा यह कि ईरान के लगभग हर स्तर के बड़े नेता खत्म हो चुके हैं, जिससे वह अब दुनिया को धमकी देने की स्थिति में नहीं है।
3. होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर गतिरोध
हाल ही में ट्रंप ने तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और जापान जैसे देशों से अपने युद्धपोत भेजने की अपील की थी।
- सहयोगियों का रुख: यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और जर्मनी ने स्पष्ट किया कि वे इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे।
- तेल की कीमतें: ईरान द्वारा जलमार्ग बंद करने और माइन्स (Mines) बिछाने की खबरों के बीच वैश्विक तेल की कीमतों में 40% से 50% तक का उछाल आया है।
4. जापान और दक्षिण कोरिया को भी चेतावनी
ट्रंप ने केवल यूरोप ही नहीं, बल्कि एशियाई सहयोगियों (जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया) को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “दुनिया का सबसे ताकतवर देश होने के नाते हमें किसी की मदद की ज़रूरत नहीं है और न ही हम अब इसकी उम्मीद रखते हैं।”
📊 युद्ध की ताज़ा स्थिति (War Status: March 17, 2026)
| क्षेत्र | वर्तमान स्थिति |
| ईरानी नेतृत्व | ट्रंप का दावा: शीर्ष नेतृत्व ‘साफ’ हो चुका है। |
| होर्मुज़ जलमार्ग | ईरान द्वारा आंशिक नाकेबंदी; व्यापारिक जहाज़ों का आवागमन ठप। |
| वैश्विक अर्थव्यवस्था | कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल; सप्लाई चेन बाधित। |
| अमेरिकी रणनीति | “अमेरिका फर्स्ट” – बिना सहयोगियों के अकेले सैन्य अभियान जारी रखने का फैसला। |
📌 PNN24 विश्लेषण:
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान नेटो के भविष्य पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। यदि अमेरिका वास्तव में अकेले आगे बढ़ता है, तो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बना वैश्विक सुरक्षा ढांचा पूरी तरह चरमरा सकता है। वहीं, ईरान की सैन्य क्षमता के ‘तबाही’ के दावों की पुष्टि अभी अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र सूत्रों द्वारा की जानी बाकी है।









