‘क्षेत्रीय महायुद्ध की आड़ में गजा का गला घोंट रहा इज़राइल’; ईरान पर हमले के बहाने सीमाएं सील, भूख और दवाओं की कमी से तड़प रहे 20 लाख फिलिस्तीनी
दुनिया की नज़रें ईरान-इज़राइल युद्ध पर, और गजा में शुरू हुआ 'खामोश नरसंहार'। इज़राइल ने बंद किए मानवीय गलियारे, 200-300% बढ़ी महंगाई। क्या क्षेत्रीय तनाव की आड़ में गाजा को भूल गई दुनिया? PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
PNN24 News: 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमले के बाद पूरी दुनिया का ध्यान क्षेत्रीय महायुद्ध की ओर खिंच गया है। लेकिन इस बड़े तनाव की छाया में गाजा पट्टी के 20 लाख से अधिक लोग एक ऐसे ‘खामोश नरसंहार’ का शिकार हो रहे हैं, जिस पर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की चुप्पी भयावह है। विशेषज्ञों का मानना है कि इज़राइल क्षेत्रीय युद्ध का इस्तेमाल गाजा में अपने अपराधों को छिपाने और ‘व्यवस्थित नरसंहार’ को तेज़ करने के लिए एक ‘कवर’ के रूप में कर रहा है।
1. मानवीय सहायता पर ‘ताला’ और अकाल का खतरा
ईरान के साथ युद्ध शुरू होते ही इज़राइल ने गाजा के सभी प्रवेश द्वारों को पूरी तरह बंद कर दिया।
- जरूरत बनाम आपूर्ति: गाजा को रोज़ाना 600 ट्रक सहायता की ज़रूरत है, लेकिन वर्तमान में ‘केरेम अबू सलेम’ सीमा से केवल नाममात्र की आपूर्ति हो रही है।
- महंगाई की मार: यूनिसेफ (UNICEF) के अनुसार, भोजन और सफाई उत्पादों की कीमतें 200 से 300 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
- अकाल: यूरो-मेड मॉनिटर के प्रमुख रामी अब्दू ने चेतावनी दी है कि बच्चों में कुपोषण और अकाल फिर से फैल रहा है।
2. स्वास्थ्य प्रणाली ध्वस्त: इलाज के अभाव में मौतें
इज़राइली बमबारी ने गाजा के अस्पतालों को पहले ही खंडहर बना दिया था, अब ईंधन की कमी ने रही-सही कसर पूरी कर दी है।
- मेडिकल ब्लॉक: हज़ारों घायल और गंभीर मरीज़ इलाज के लिए विदेश जाने का इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन सीमाएं बंद होने से वे अब मौत के मुँह में हैं।
- अस्पताल बंद: ईंधन और दवाओं की कमी के कारण बचे हुए अस्पताल भी न्यूनतम क्षमता पर काम कर रहे हैं।
3. ‘युद्धविराम’ का उल्लंघन और जारी हत्याएं
अक्टूबर में हमास के साथ हुआ “युद्धविराम” समझौता अब केवल कागजों पर रह गया है।
- ताज़ा हमले: रविवार और सोमवार को नुसेरात शरणार्थी शिविर पर हुए हमलों में दो बच्चों समेत 6 लोग मारे गए।
- खौफनाक आंकड़े: ‘युद्धविराम’ की शुरुआत से अब तक इज़राइली हमलों में 648 लोग मारे जा चुके हैं और 18,000 घायल हुए हैं।
4. राजनीतिक शून्यता: जानबूझकर रोका जा रहा पुनर्निर्माण
जनवरी 2026 में बनी ‘फिलिस्तीनी राष्ट्रीय गाजा प्रशासन समिति’ को इज़राइल काम नहीं करने दे रहा है।
- नेतन्याहू की रणनीति: विश्लेषक अहेद फरवाना के अनुसार, पीएम नेतन्याहू क्षेत्रीय युद्ध का फायदा उठाकर ‘समझौते के दूसरे चरण’ (सेना की वापसी और पुनर्निर्माण) को टाल रहे हैं।
- स्थायी अस्थिरता: इज़राइल वर्तमान में गाजा के 60% हिस्से पर नियंत्रण रखता है और वह नहीं चाहता कि यहाँ कोई नागरिक प्रशासन मजबूती से काम करे।
📊 गाजा: एक नज़र में (2026 की स्थिति)
| समस्या | वर्तमान स्थिति | प्रभाव |
| सहायता ट्रक | ज़रूरत का 10% से भी कम | व्यापक भुखमरी और अकाल |
| स्वास्थ्य सेवा | 80% अस्पताल बंद या आंशिक सक्रिय | मरीजों की तड़प-तड़प कर मौत |
| आर्थिक स्थिति | 300% महंगाई | दैनिक आवश्यकताओं की अप्राप्यता |
| सैन्य नियंत्रण | 60% भूभाग पर इज़राइली कब्जा | पुनर्निर्माण कार्य पूरी तरह ठप |
📌 कूटनीतिक निष्कर्ष:
इज़राइल बहुत ही चालाकी से दुनिया का ध्यान ईरान की ओर मोड़कर गाजा में ‘सामूहिक दंड’ की नीति अपना रहा है। जब तक अंतरराष्ट्रीय दबाव फिर से गाजा की मानवीय स्थिति पर केंद्रित नहीं होता, तब तक यह घेराबंदी एक पूरी पीढ़ी को खत्म कर देगी।












