‘होर्मुज़ में मची समुद्री तबाही’: 12 दिनों में 16 जहाजों पर हमले; बुधवार की रात 3 और कार्गो जहाजों को बनाया गया निशाना, खाड़ी में जहाजों का आवागमन लगभग ठप
समुद्र में 'महायुद्ध': होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों की झड़ी। UKMTO के मुताबिक अब तक 16 जहाजों को बनाया गया निशाना। बुधवार और गुरुवार की रात तीन और कार्गो जहाजों पर हमला। क्या ठप हो जाएगा दुनिया का 20% तेल व्यापार? PNN24 की रिपोर्ट।

तारिक खान
PNN24 News: मध्य-पूर्व में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब ज़मीन से निकलकर समुद्र के सीने पर पहुँच गया है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) की ताज़ा रिपोर्ट ने वैश्विक व्यापारिक जगत में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में 16 जहाजों पर हमले हो चुके हैं।
1. बुधवार-गुरुवार की रात: ‘ब्लैक नाइट’
UKMTO के अनुसार, बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात इस क्षेत्र के लिए सबसे घातक रही:
- 3 जहाजों पर प्रहार: तीन अलग-अलग कार्गो जहाजों को ‘अज्ञात मिसाइलों/प्रोजेक्टाइल्स’ से निशाना बनाया गया। इनमें से एक जहाज ‘मयूरे नरी’ (Mayuree Naree) में भीषण आग लग गई, जिसके बाद ओमान की नौसेना को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा।
- जापानी और मार्शल आइलैंड्स के जहाज: हमलों का शिकार होने वाले अन्य जहाजों में जापान की ‘ONE Majesty’ और मार्शल आइलैंड्स का ‘Star Gwyneth’ शामिल हैं।
2. ‘संदिग्ध गतिविधियां’ और समुद्री खौफ
हमलों के अलावा, UKMTO ने इस दौरान 4 “संदिग्ध गतिविधियों” की रिपोर्ट भी दर्ज की है।
- ड्रोन और स्पीड बोट्स: बताया जा रहा है कि व्यापारिक जहाजों के पास ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की स्पीड बोट्स और ड्रोन मंडराते देखे गए हैं।
- माइन बिछाने का खतरा: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि ईरान ने होर्मुज़ के संकरे रास्तों में समुद्री बारूद (Mines) बिछाना शुरू कर दिया है, जिससे जहाजों का गुजरना ‘सुसाइड मिशन’ जैसा हो गया है।
3. व्यापार पर असर: 138 से घटकर 2 जहाज
आंकड़े बताते हैं कि इस युद्ध ने दुनिया की लाइफलाइन को कैसे काट दिया है:
- आवागमन ठप: युद्ध से पहले होर्मुज़ से रोज़ाना औसतन 138 जहाज गुजरते थे। बुधवार को यह संख्या घटकर मात्र 2 रह गई।
- भारत पर प्रभाव: इनमें से एक जहाज गुजरात के कांडला पोर्ट की ओर आ रहा था। भारत ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है क्योंकि भारत का 50% कच्चा तेल और 60% एलपीजी इसी रास्ते से आता है।
4. सुरक्षा की स्थिति: ‘नो गो ज़ोन’
अमेरिकी नौसेना ने फिलहाल व्यापारिक जहाजों को ‘एस्कॉर्ट’ (सुरक्षा घेरा) देने से मना कर दिया है क्योंकि खतरा बहुत ज़्यादा है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों का प्रीमियम आसमान पर पहुँचा दिया है, जिससे शिपिंग लागत में भारी उछाल आया है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट’ है। अगर यहाँ हमले नहीं थमे, तो वैश्विक बाज़ार में तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल को पार कर सकती हैं, जिसका सीधा असर आपकी जेब और रसोई पर पड़ेगा।










