ख़ामेनेई की शहादत के बाद ‘अंतरिम लीडरशिप काउंसिल’ का गठन; जाने कौन है आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी जिन्होंने लिया है खामेनेई की जगह
ख़ामेनेई के बाद कौन? ईरान में 'अंतरिम लीडरशिप काउंसिल' का गठन। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान, चीफ जस्टिस मोहसनी-एजई और आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी संभालेंगे देश की बागडोर। जानिए कौन हैं अली रज़ा आराफ़ी, जो बन सकते हैं अगले 'सुप्रीम लीडर'।

मो0 सलीम
PNN24 News: आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की शहादत के बाद ईरान के भविष्य को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच एक बड़ी खबर आई है। ईरानी संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत देश की बागडोर संभालने के लिए ‘अंतरिम लीडरशिप काउंसिल’ (Interim Leadership Council) का गठन कर दिया गया है। जब तक ईरान का नया सर्वोच्च नेता नहीं चुन लिया जाता, तब तक यह तीन सदस्यीय परिषद देश के सभी महत्वपूर्ण फैसले लेगी।
1. कौन हैं काउंसिल के तीन शक्तिशाली सदस्य?
ईरानी संविधान के मुताबिक, इस काउंसिल में देश के तीन शीर्ष स्तंभों को शामिल किया गया है:
- मसूद पेज़ेश्कियान: ईरान के वर्तमान राष्ट्रपति।
- ग़ुलाम-हुसैन मोहसनी-एजई: ईरान के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (न्यायपालिका प्रमुख)।
- आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी: गार्जियन काउंसिल के सदस्य, जिन्हें इस परिषद के ‘ज्यूरिस्ट’ पद के लिए चुना गया है।
2. काउंसिल के अधिकार और सीमाएं
भले ही यह काउंसिल देश चलाएगी, लेकिन इसके पास असीमित अधिकार नहीं हैं। कई संवेदनशील फैसलों के लिए इसे ‘सलाहकार परिषद’ (Expediency Council) के तीन-चौथाई सदस्यों की मंजूरी लेनी होगी। इन फैसलों में शामिल हैं:
- युद्ध या शांति की घोषणा करना।
- रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के नए कमांडरों की नियुक्ति।
- देश की सामान्य नीतियों का निर्धारण और जनमत संग्रह।
3. आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी: ‘डार्क हॉर्स’ से ‘किंगमेकर’ तक
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण नाम अली रज़ा आराफ़ी का है। 1959 में यज़्द प्रांत में जन्मे आराफ़ी को ख़ामेनेई का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता था।
- धार्मिक और राजनीतिक कद: आराफ़ी ने शिया जगत के दिग्गज विद्वानों से शिक्षा ली है। वे क़ुम मदरसे के डायरेक्टर और ईरान के सभी मदरसों के प्रमुख रह चुके हैं।
- पश्चिमी सोच के कट्टर विरोधी: आराफ़ी अपनी ‘एंटी-वेस्टर्न’ विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। 2017 में उन्होंने अमेरिका को “दुनिया में मानवाधिकार उल्लंघन का केंद्र” बताया था।
- संभावित उत्तराधिकारी: पहले उन्हें “हुज्जत अल-इस्लाम” कहा जाता था, लेकिन अब उनके नाम के आगे “आयतुल्लाह” जुड़ चुका है। उनकी पदोन्नति और ख़ामेनेई के करीब होने के कारण विशेषज्ञ उन्हें अगले सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) के सबसे प्रबल दावेदार के रूप में देख रहे हैं।
4. सेना और सुरक्षा पर बड़ा फैसला संभव
हालिया हमलों में रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स और सशस्त्र बलों के कई शीर्ष कमांडरों की मौत के बाद, यह काउंसिल जल्द ही नई नियुक्तियों पर बड़ा फैसला ले सकती है। अली रज़ा आराफ़ी का रक्षा कार्यक्रमों और ‘प्रतिरोध’ की नीति पर जोर देना यह संकेत देता है कि ईरान की सैन्य रणनीति और भी आक्रामक हो सकती है।
📊 ईरान की अंतरिम शासन प्रणाली (एक नज़र में)
| पद | सदस्य | मुख्य जिम्मेदारी |
| प्रशासनिक प्रमुख | मसूद पेज़ेश्कियान (राष्ट्रपति) | सरकारी कामकाज का संचालन |
| न्यायिक प्रमुख | मोहसनी-एजई (चीफ जस्टिस) | कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था |
| धार्मिक/ज्यूरिस्ट प्रमुख | अली रज़ा आराफ़ी (आयतुल्लाह) | धार्मिक नेतृत्व और विचारधारा |











