‘अल-अदीरी’ बेस बना आग का गोला: ईरान का कतर स्थित अमेरिकी हेलिकॉप्टर बेस पर बड़ा हमला; बैलिस्टिक मिसाइलों ने मचाई भारी तबाही

कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान का भीषण प्रहार! 'अल-अदीरी' बेस पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों की बारिश। हेलिकॉप्टर यूनिट और कमांड बिल्डिंग तबाह। कुवैत में दो दमकलकर्मियों की मौत, अमेरिका की चुप्पी।

तारिक खान

PNN24 News: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने शनिवार रात उत्तरी कतर में स्थित प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकाने ‘अल-अदीरी’ (Al-Adeiri) पर भीषण हमला करने का दावा किया है। ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों और ‘कामीकाज़’ ड्रोनों ने इस बेस के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह तहस-नहस कर दिया है।

1. हमले का निशाना: कमांड सेंटर और फ्यूल टैंक

IRGC द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह हमला सुनियोजित तरीके से किया गया था। हमले के मुख्य निशाने थे:

  • मरम्मत केंद्र: जहाँ अमेरिकी हेलिकॉप्टरों को तैयार और मेंटेन किया जाता है।
  • ईंधन भंडार: हेलिकॉप्टर और जहाजों के विशाल ईंधन टैंकों को निशाना बनाया गया, जिससे बेस पर भीषण आग लग गई।
  • कमांड बिल्डिंग: बेस के मुख्य नियंत्रण कक्ष (Command & Control) को भारी नुकसान पहुँचा है।

2. ‘अल-अदीरी’ की सामरिक अहमियत

उत्तरी कतर में स्थित यह बेस अमेरिकी वायु सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहाँ न केवल लड़ाकू हेलिकॉप्टर यूनिट्स तैनात हैं, बल्कि यह इलाका निगरानी (Surveillance) और खुफिया गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस हमले से पूरे क्षेत्र में अमेरिका की जासूसी क्षमताओं को बड़ा झटका लगा है।

3. कुवैत में हलचल और कैजुअल्टी

इस हमले का असर पड़ोसी देशों में भी देखा जा रहा है। बीबीसी फ़ारसी के अनुसार:

  • कुवैत का नुकसान: कुवैत के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की है कि आग बुझाने के अभियान के दौरान दो फायरफाइटर (दमकलकर्मी) शहीद हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने हमले के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।
  • अमेरिकी चुप्पी: हमेशा की तरह, पेंटागन और वॉशिंगटन ने फिलहाल इस हमले की गंभीरता और नुकसान के आंकड़ों पर चुप्पी साध रखी है।

4. ईरान की ’20वीं लहर’ और नई चेतावनी

यह हमला ईरान द्वारा शुरू की गई ‘हमलों की 20वीं लहर’ का हिस्सा माना जा रहा है। IRGC का कहना है कि यह उन हमलों का जवाब है जो हिंद महासागर में उनके जहाजों पर किए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि कतर जैसे शांत माने जाने वाले देश में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि अब खाड़ी का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं है।

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