आर्थिक विश्लेषण: क्या आपकी जेब जलाएगा महायुद्ध? सोने के दाम में भारी उतार-चढ़ाव और $120 के पार पहुँचा कच्चा तेल

मिसाइलों के साथ-साथ गिर रहे हैं शेयर बाज़ार; भारत में पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतों पर मंडराया संकट.

ईदुल अमीन

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकियों और रेड सी में हूतियों के हमलों ने तेल बाज़ार में आग लगा दी है:

सोने की कीमतों में ‘शॉकवेव’: ₹1.44 लाख के पार

युद्ध के अनिश्चित माहौल में निवेशकों ने सुरक्षित निवेश (Safe-Haven) के लिए सोने का रुख किया है।

  • अंतरराष्ट्रीय बाज़ार: वैश्विक बाज़ार में सोना $4,430 प्रति औंस के करीब पहुँच गया है।
  • भारत में भाव: दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,44,720 प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू रही है। हालांकि, ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली के कारण कीमतों में बीच-बीच में गिरावट भी देखी जा रही है, जिससे आम खरीदार असमंजस में है।

कच्चा तेल: होर्मुज की घेराबंदी का असर

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकियों और रेड सी में हूतियों के हमलों ने तेल बाज़ार में आग लगा दी है:

  • ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): कच्चा तेल $120 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है।
  • सप्लाई चैन ठप: दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। रास्ते बंद होने से शिपिंग और इंश्योरेंस का खर्च 15-20% तक बढ़ गया है।
  • गैस संकट: कतर के गैस ठिकानों पर हमलों के बाद एशिया में LNG की कीमतों में 140% तक का भारी उछाल आया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर ‘ट्रिपल अटैक’

भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, इसलिए इस युद्ध का सबसे गहरा असर भारतीय मध्यम वर्ग पर पड़ने वाला है:

  1. महंगा होगा ईंधन: अगर कच्चा तेल $120 पर बना रहा, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹10 से ₹15 तक की बढ़ोतरी की संभावना है।
  2. LPG और हवाई किराया: भारत अपनी 60% LPG खाड़ी देशों से मंगाता है। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने के साथ-साथ हवाई टिकट भी 30% तक महंगे हो सकते हैं।
  3. कमज़ोर होता रुपया: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 92 के ऐतिहासिक निचले स्तर को पार कर गया है। इससे मोबाइल, लैपटॉप और अन्य विदेशी सामान महंगे हो जाएंगे।

शेयर बाज़ार में हाहाकार

युद्ध की खबरों के बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (Sensex) और निफ्टी में भारी गिरावट देखी जा रही है। विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाज़ार से बड़े पैमाने पर पैसा निकालना शुरू कर दिया है, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए हैं।

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