‘ईरान का बड़ा दांव: IRGC के दिग्गज मोहम्मद बाक़र ज़ोलग़द्र बने नए सुरक्षा प्रमुख’; लारिजानी की मौत के बाद संभाली सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की कमान, सीधे ‘सर्वोच्च नेता’ से मिली मंज़ूरी
ईरान: अली लारिजानी की मौत के बाद ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद बाक़र ज़ोलग़द्र बने नए सुरक्षा प्रमुख। इजरायली हमले में मारे गए थे लारिजानी। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के दिग्गज कमांडर को मिली सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की कमान। PNN24 की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट।

तारिक खान
PNN24 News: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को नया नेतृत्व प्रदान किया है। इजरायली हवाई हमले में अली लारिजानी की मौत के बाद, मोहम्मद बाक़र ज़ोलग़द्र (Mohammad Bagher Zolghadr) को ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ (SNSC) का नया सचिव नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति ईरान के रणनीतिक रुख को और अधिक आक्रामक बनाने के संकेत दे रही है।
1. सर्वोच्च नेता की सीधी मंज़ूरी
राष्ट्रपति कार्यालय में संचार उप प्रमुख सैयद मोहम्मद मेहदी तबातबाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इस नियुक्ति की पुष्टि की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ज़ोलग़द्र का चयन ईरान के सर्वोच्च नेता (मोजतबा खामेनेई) की राय और अंतिम मंज़ूरी के बाद किया गया है। युद्ध के इस दौर में यह पद ईरान के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
2. अली लारिजानी की कमी और ‘शहादत’
ज़ोलग़द्र ने अली लारिजानी का स्थान लिया है, जिनकी मृत्यु 16 मार्च 2026 को तेहरान के बाहरी इलाके में स्थित उनकी बेटी के घर पर हुए एक इजरायली मिसाइल हमले में हुई थी। लारिजानी को ईरान की युद्ध रणनीति का ‘दार्शनिक और वास्तुकार’ माना जाता था। उनकी मौत को ईरान के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।
3. कौन हैं मोहम्मद बाक़र ज़ोलग़द्र?
ज़ोलग़द्र का प्रोफाइल यह स्पष्ट करता है कि ईरान अब अधिक सैन्य और सुरक्षा-केंद्रित रणनीति अपनाएगा:
- IRGC का अनुभव: वह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के शीर्ष कमांडरों में से एक रहे हैं और ब्रिगेडियर जनरल के पद पर रहे हैं।
- कुद्स फोर्स का आधार: ज़ोलग़द्र ‘रमज़ान ओवरसीज़ बेस’ के संस्थापकों में शामिल थे, जो बाद में प्रसिद्ध ‘कुद्स फोर्स’ का आधार बना।
- प्रमुख पद: उन्होंने 8 वर्षों तक IRGC के जॉइंट स्टाफ के प्रमुख और 8 वर्षों तक डिप्टी कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्य किया है।
- न्यायपालिका और गृह मंत्रालय: वह उप गृह मंत्री और न्यायपालिका प्रमुख के रणनीतिक सलाहकार भी रह चुके हैं।
4. इस नियुक्ति के मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि ज़ोलग़द्र की नियुक्ति यह दर्शाती है कि ईरान अब ‘उत्तरजीविता मोड’ (Survival Mode) से निकलकर जवाबी कार्रवाई की ओर बढ़ सकता है। ज़ोलग़द्र की पृष्ठभूमि विदेशी ऑपरेशन्स और अनियमित युद्ध (Irregular Warfare) में रही है, जो भविष्य में इजरायल और अमेरिका के खिलाफ ईरान की ‘प्रॉक्सी’ और प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाइयों को तेज़ कर सकती है।
📊 ईरान का नया सुरक्षा ढांचा: एक नज़र में (New Security Structure)
| पद | नाम | पृष्ठभूमि |
| SNSC सचिव | मोहम्मद बाक़र ज़ोलग़द्र | IRGC पूर्व डिप्टी कमांडर-इन-चीफ |
| पूर्व सचिव (दिवंगत) | अली लारिजानी | पूर्व संसद अध्यक्ष एवं परमाणु वार्ताकार |
| नियुक्ति का आधार | सर्वोच्च नेता की मंज़ूरी | युद्धकालीन रणनीति और सैन्य अनुभव |
| मुख्य जिम्मेदारी | सुरक्षा और रक्षा नीति | इजरायल के खिलाफ जवाबी हमले का समन्वय |
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अली लारिजानी जैसे कूटनीतिज्ञ के जाने के बाद ज़ोलग़द्र जैसे कट्टर सैन्य कमांडर का आना यह संदेश है कि तेहरान अब बातचीत के बजाय ‘ताकत’ के रास्ते पर चलने को तैयार है। पश्चिम एशिया का युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ कूटनीति की जगह पूरी तरह से सैन्य रणनीतियों ने ले ली है।









