ईरान में कयामत की रात: लड़कियों के स्कूल पर इज़रायली बमबारी में 85 मासूमों की मौत; मलबे में तब्दील हुआ मीनाब का प्राथमिक विद्यालय

ईरान में महायुद्ध के बीच भीषण त्रासदी! होर्मोज़गान के मीनाब में लड़कियों के स्कूल पर इज़रायली हमला, 85 मासूमों की मौत। तेहरान के स्कूल पर भी बमबारी। 'सैन्य ठिकानों' के दावे पर उठे सवाल।

आफताब फारुकी

PNN24 News: अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे साझा सैन्य हमलों ने अब एक भयावह मानवीय त्रासदी का रूप ले लिया है। दक्षिणी ईरान के होर्मोज़गान प्रांत के मीनाब शहर में शनिवार को एक इज़रायली हवाई हमले में लड़कियों के प्राथमिक विद्यालय को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया। इस हमले में अब तक 85 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें अधिकांश मासूम छात्राएं हैं।

मलबे से निकल रही हैं लाशें, 63 घायल ईरान की अर्धसरकारी तसनीम न्यूज एजेंसी ने मीनाब न्यायपालिका के हवाले से बताया कि हमले के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है। सरकारी एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, 63 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घटनास्थल पर अभी भी बचाव कर्मी मलबे को हटाने का काम कर रहे हैं, जिससे हताहतों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।

विदेश मंत्री का संकल्प: “जरूर दिया जाएगा जवाब” ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नष्ट हुए स्कूल की विचलित कर देने वाली तस्वीरें साझा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा:

“लड़कियों का स्कूल पूरी तरह नष्ट कर दिया गया और मासूम बच्चे मारे गए। ईरानी जनता के खिलाफ इन अपराधों का जवाब जरूर दिया जाएगा।”

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने भी इस “घोर अपराध” की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

तेहरान में भी स्कूल पर हमला त्रासदी यहीं नहीं रुकी। मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, राजधानी तेहरान के पूर्वी इलाके में स्थित एक अन्य स्कूल पर भी इज़रायली हमला हुआ, जिसमें कम से कम दो छात्रों की मौत हो गई। इन हमलों ने अमेरिका और इज़रायल के उन दावों की पोल खोल दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे केवल “सैन्य ठिकानों” को निशाना बना रहे हैं।

ट्रंप के वादे और ज़मीनी हकीकत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में कहा था कि यह अभियान ईरानी जनता की सहायता और शासन को दंडित करने के लिए है। लेकिन ज़मीनी हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, मासूम नागरिकों और बच्चों की मौत ने इस युद्ध के नैतिक और अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरानी सरकार अब इसे “ईरानी जनता के खिलाफ सीधी आक्रामकता” के रूप में वैश्विक मंच पर पेश करने की तैयारी में है।

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