‘काशी विद्यापीठ में फर्जीवाड़े का खेल: बिना जमीन के महादेव पीजी कॉलेज बना नोडल केंद्र’; रजिस्ट्रार और प्रबंधक के ‘गठजोड़’ ने परीक्षा की शुचिता को किया संदेहास्पद, विभूति हत्याकांड में गहराया शक!

वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में 'शिक्षा माफिया' का बोलबाला? बिना जमीन के चल रहे महादेव पीजी कॉलेज को बनाया गया नोडल केंद्र। रजिस्ट्रार सुनीता पांडेय और प्रबंधक अजय सिंह के गठजोड़ पर उठे सवाल। क्या विभूति की मौत महज हादसा थी या सोची-समझी हत्या? PNN24 का बड़ा खुलासा।

तारिक आज़मी

वाराणसी (PNN24 News): महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) से संबद्ध ‘महादेव पीजी कॉलेज’ एक बार फिर संगीन आरोपों के घेरे में है। भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और अब हत्या जैसे गंभीर आरोपों की आंच सीधे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों तक पहुँच गई है। सवाल यह है कि जिस कॉलेज के पास अपनी जमीन तक नहीं है, उसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने ‘नोडल केंद्र’ बनाकर परीक्षाओं की गोपनीयता को दांव पर क्यों लगाया?

1. कागजों पर कॉलेज: 2002 से 2026 तक का ‘जमीन विहीन’ सफर

बरियासनपुर स्थित महादेव पीजी कॉलेज की नींव 2002 में रखी गई थी। आरोप है कि यह कॉलेज आज 2026 में भी बिना अपनी निजी जमीन के संचालित हो रहा है।

  • विवादित भूमि: इलाहाबाद बोर्ड ऑफ रेवेन्यू की अदालत ने हाल ही में इस जमीन के स्वामित्व को लेकर अखबारों में सम्मन प्रकाशित कराया है।
  • नियमों की धज्जियां: उत्तर प्रदेश शासन की गाइडलाइन के अनुसार, विवादित जमीन पर कोई भी शैक्षणिक संस्थान नहीं चलाया जा सकता। फिर भी, इसकी मान्यता न केवल जारी है, बल्कि इसे वीआईपी (VIP) ट्रीटमेंट भी मिल रहा है।

2. रजिस्ट्रार और प्रबंधक का ‘कथित गठजोड़’

महादेव पीजी कॉलेज के प्रबंधक अजय सिंह और विद्यापीठ की रजिस्ट्रार सुनीता पांडेय के बीच की घनिष्ठता अब चर्चा का विषय है।

  • फर्जी लेटर का खेल: आरोप है कि 22 जनवरी 2022 को रजिस्ट्रार ने एक फर्जी लेटर को आधिकारिक रूप से जारी किया। शिकायतकर्ता कीर्ति भूषण का दावा है कि यदि इस लेटर की पोल खुलती, तो रजिस्ट्रार की नौकरी पर आंच आ सकती थी।
  • पर्दे के पीछे का रसूख: रजिस्ट्रार के पति राघवेन्द्र पांडेय, जो एक प्रमुख शैक्षणिक संगठन से जुड़े हैं, उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अजय सिंह के साथ इन दोनों की लगातार मौजूदगी साठगांठ की ओर इशारा करती है।

विभूति हत्याकांड के वादी मुकदमा तथा मृतक के भाई कृति भूषण द्वारा उपलब्ध कराया गया व्हाट्सअप चैट का स्क्रीन शॉट

3. विभूति की मौत: एक्सीडेंट या ‘शिकायत’ की कीमत?

इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज पहलू विभूति (संबंधित व्यक्ति का भाई) की संदिग्ध मृत्यु है।

  • संदिग्ध मौत: 10 फरवरी 2022 को विभूति की मौत हुई, जिसे पुलिस ने रोड एक्सीडेंट बताया। मगर मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है और किसी भी आरोपी को हत्या के आरोप में आरोप मुक्त नहीं किया गया है।
  • हत्या का आरोप: शिकायतकर्ता कीर्ति भूषण का आरोप है कि उनके भाई की हत्या इसलिए की गई ताकि रजिस्ट्रार को फर्जीवाड़े के कानूनी फंदे से बचाया जा सके। उनका दावा है कि रजिस्ट्रार के फंसने की शंका ही इस ‘सुनियोजित हत्या’ की मुख्य वजह थी।

विभूति हत्याकांड के वादी मुकदमा तथा मृतक के भाई कृति भूषण द्वारा उपलब्ध कराया गया व्हाट्सअप चैट का स्क्रीन शॉट

4. नोडल केंद्र और विश्वविद्यालय का ‘मौन’

इतने विवादों के बावजूद महादेव पीजी कॉलेज को परीक्षाओं के लिए ‘नोडल केंद्र’ बना दिया गया है।

  • जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते अधिकारी: जब इस बारे में सवाल किए गए, तो परीक्षा नियंत्रक ने संबद्धता विभाग पर और संबद्धता विभाग ने परीक्षा नियंत्रक पर गेंद डाल दी।
  • कुलपति का पक्ष: वीसी का कहना है कि मामला फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है और इसकी जांच कराई जाएगी। वहीं, रजिस्ट्रार सुनीता पांडेय ने इस पर अभी तक कोई पक्ष नहीं रखा है। बयान आने पर खबर अपडेट क्या जायेगा

📊 विवाद के मुख्य बिंदु: एक नज़र में (At a Glance)

बिंदु विवरण
जमीन का विवाद इलाहाबाद बोर्ड ऑफ रेवेन्यू में केस लंबित, सम्मन जारी।
मान्यता का आधार बिना निजी भूमि के पीजी कॉलेज की मान्यता पर सवाल।
गंभीर आरोप फर्जी दस्तावेज तैयार करना और ‘हत्या’ की साजिश का शक।
प्रशासनिक पद रजिस्ट्रार सुनीता पांडेय और प्रबंधक अजय सिंह का गठजोड़।
वर्तमान स्थिति विवादित कॉलेज को विद्यापीठ का ‘नोडल केंद्र’ बनाया गया।

📌

क्या काशी विद्यापीठ का प्रबंधन वाकई अंधा बन गया है या यह भ्रष्टाचार की एक गहरी खाई है? एक ऐसा कॉलेज जिस पर हत्या और फर्जीवाड़े के आरोप हों, उसे नोडल केंद्र बनाना छात्रों के भविष्य और परीक्षा की शुचिता के साथ खिलवाड़ है। प्रशासन को तत्काल प्रभाव से इस कॉलेज की मान्यता की जांच कर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

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