‘गंगा में इफ्तार: फिल्मी पटकथा या हकीकत?’; एसएम यासीन ने पुलिस की ‘हाईजैक’ थ्योरी पर उठाए सवाल, बोले— “सीवर और क्रूज़ से अपवित्र नहीं होती गंगा?”
वाराणसी: गंगा में नाव पर इफ्तार के आरोपी 14 युवकों की गिरफ्तारी पर भड़के एसएम यासीन। पुलिस की 'नाव हाईजैक' वाली कहानी को बताया फिल्मी पटकथा। बोले— "उनका जुर्म सिर्फ यह है कि वे मुसलमान हैं"। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): काशी के पंचगंगा घाट पर नाव पर इफ्तार करने के आरोप में 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी और उन पर लगी गंभीर धाराओं ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। ज्ञानवापी मस्जिद (अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी) के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई को ‘फिल्मी पटकथा’ करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
1. “जुर्म सिर्फ यह कि वे मुसलमान हैं”
ईद के मौके पर अपना बयान जारी करते हुए एसएम यासीन ने जेल में बंद 14 युवकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह एक गैर-इरादतन किया गया कार्य था, लेकिन इसकी इतनी बड़ी सजा दी जा रही है। उनका असली जुर्म शायद यह है कि वे मुसलमान हैं। नफरती जहन रखने वालों को इन युवकों के वीडियो के जरिए एक हथियार मिल गया है।”
2. पुलिस की ‘हाईजैक’ कहानी पर अचंभा
एसएम यासीन ने वाराणसी पुलिस की उस थ्योरी पर कड़ा प्रहार किया जिसमें नाव और नाविक को ‘हाईजैक’ करने की बात कही गई है।
- फिल्मी पटकथा: उन्होंने कहा कि नाविक बाहुल्य क्षेत्र में एक नाविक का अपहरण कर नाव हाईजैक करने की बात पूरी तरह काल्पनिक और फिल्मी लगती है।
- गंभीर धाराएं: यासीन ने सवाल उठाया कि इसी फिल्मी कहानी के आधार पर ऐसी धाराएं बढ़ा दी गई हैं कि अब रासुका (NSA) तक की मांग होने लगी है। उन्होंने आला अधिकारियों से इस ‘पटकथा’ की सत्यता परखने की अपील की।
3. गंगा की पवित्रता और ‘दोहरा मापदंड’
बयान में गंगा की पवित्रता को लेकर चल रही बहस पर भी तीखी टिप्पणी की गई। एसएम यासीन ने कहा:
- सीवर और क्रूज़: गंगा में गिरने वाले नालों, बड़े क्रूज़ और किनारे बने होटलों के सीवर पर प्रशासन खामोश क्यों है?
- शंकराचार्य और विशेषज्ञों का हवाला: उन्होंने शंकराचार्य और संकटमोचन फाउंडेशन के पंडित विशंभर नाथ मिश्र के शोध का जिक्र करते हुए कहा कि गंगा का पानी पीने लायक नहीं बचा है, लेकिन उस पर कार्रवाई के बजाय इफ्तार करने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।
- उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी के स्पष्ट विचारों के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
4. निष्पक्ष जांच की मांग
अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से अपील की है कि वे इस मामले में किसी के दबाव में न आएं। उन्होंने मांग की कि ‘अपहरण और हाईजैक’ के दावों की जमीनी हकीकत जांची जाए ताकि उन 14 युवकों के साथ इंसाफ हो सके।
📊 घटनाक्रम: एक नज़र में (Case Summary)
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | पंचगंगा घाट, वाराणसी (गंगा नदी) |
| आरोपी | 14 मुस्लिम युवक (वर्तमान में जेल में) |
| आरोप | नाव पर इफ्तार, नाविक का कथित अपहरण/हाईजैक |
| प्रतिक्रिया | एसएम यासीन (सचिव, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद) |
| मुख्य तर्क | कार्रवाई भेदभावपूर्ण और पुलिसिया कहानी मनगढ़ंत |
📌
वाराणसी जैसे सांस्कृतिक शहर में गंगा की मर्यादा सर्वोपरि है, लेकिन कानून की धाराओं का प्रयोग तथ्यों के आधार पर होना चाहिए। यदि ‘हाईजैक’ जैसी गंभीर कहानी में झोल है, तो यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है। प्रशासन को चाहिए कि वह भावनाओं के बजाय सबूतों के आधार पर न्याय सुनिश्चित करे।











