‘डिजिटल कुरुक्षेत्र’: सोशल मीडिया पर जारी है सूचनाओं का महायुद्ध; वीडियो गेम की क्लिप्स को बताया जा रहा ‘ईरानी मिसाइल अटैक’, सावधान रहे जनता!
मिसाइलों से ज़्यादा घातक है 'फेक न्यूज़' का वार! सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और डीपफेक के ज़रिए फैलाया जा रहा है भ्रम। इज़राइल के 'मीडिया ब्लैकआउट' के बीच कैसे पहचानें सच? PNN24 की विशेष फैक्ट-चेक रिपोर्ट।

ईदुल अमीन
PNN24 News: मध्य-पूर्व में चल रहे वास्तविक युद्ध के समानांतर इंटरनेट पर एक ‘छाया युद्ध’ (Shadow War) छिड़ा हुआ है। इज़राइल में लगे ‘मीडिया ब्लैकआउट’ का फायदा उठाकर प्रोपेगेंडा मशीनें सक्रिय हो गई हैं। एक्स (X), टेलीग्राम और वॉट्सऐप पर ऐसे हज़ारों वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनका वर्तमान युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है।
1. वीडियो गेम की क्लिप्स और पुराने विजुअल्स
डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने पाया है कि वायरल हो रहे कई ‘विनाशकारी हमलों’ के वीडियो असल में:
- ‘आर्मा 3’ (Arma 3): इस मिलिट्री सिमुलेशन गेम की क्लिप्स को रात के अंधेरे में रिकॉर्ड कर ‘ईरानी एयर डिफेंस’ का बताकर शेयर किया जा रहा है।
- पुराने युद्ध: 2023-24 के रूस-यूक्रेन युद्ध और सीरिया के पुराने वीडियो को एडिट कर वर्तमान तारीख के साथ वायरल किया जा रहा है।
2. ‘डीपफेक’ का खतरनाक खेल
नेताओं के बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए एआई (AI) का सहारा लिया जा रहा है:
- भ्रामक भाषण: हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप का एक ‘डीपफेक’ वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे ईरान पर परमाणु हमले की घोषणा करते दिख रहे थे। PNN24 की जांच में यह पूरी तरह फर्जी पाया गया।
- मोजतबा खामेनेई: ईरान के नए सुप्रीम लीडर के पुराने फुटेज को एआई वॉयसओवर के साथ जोड़कर ‘सरेंडर’ या ‘युद्ध की घोषणा’ जैसे झूठे दावे किए जा रहे हैं।
3. ‘बॉट आर्मी’ का प्रोपेगेंडा
हज़ारों की संख्या में फेक अकाउंट्स (Bots) एक साथ खास हैशटैग्स को ट्रेंड करा रहे हैं ताकि वैश्विक जनमत को प्रभावित किया जा सके।
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लक्ष्य: इज़राइल की ओर से यह दिखाया जा रहा है कि ‘सब ठीक है’, जबकि ईरान समर्थक अकाउंट्स ‘इज़राइल के पूर्ण विनाश’ की झूठी खबरें फैला रहे हैं।
4. इज़राइल का ब्लैकआउट और ‘इन्फर्मेशन वैक्यूम’
जब मुख्यधारा का मीडिया (Mainstream Media) चुप करा दिया जाता है, तो लोग सोशल मीडिया की ओर भागते हैं। यही वह ‘वैक्यूम’ है जहाँ फेक न्यूज़ सबसे तेज़ी से पनपती है। आधिकारिक सूचना के अभाव में लोग किसी भी सनसनीखेज वीडियो को सच मान लेते हैं।
🛡️ PNN24 फैक्ट-चेक गाइड: सच को कैसे पहचानें?
- सोर्स की जांच करें: क्या खबर किसी प्रतिष्ठित न्यूज़ एजेंसी (जैसे PNN24, अल जजीरा, बीबीसी) ने दी है?
- रिवर्स इमेज सर्च: गूगल या ‘TinEye’ पर वीडियो का स्क्रीनशॉट सर्च करें। अक्सर वह सालों पुराना निकलता है।
- सेंसरशिप का ध्यान रखें: अगर कोई दावा कर रहा है कि वह ‘तेल अवीव के अंदर’ से लाइव है, तो सावधान रहें क्योंकि वहां वर्तमान में सख्त सिग्नल जैमिंग और पाबंदियाँ हैं।
- भावनाओं में न बहें: ‘ब्रेकिंग’ और ‘तबाही’ जैसे शब्दों वाली पोस्ट को बिना पुष्टि के शेयर न करें।










