‘वाराणसी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल’; भाजपा नेता की तहरीर पर बिना जांच 14 गिरफ्तार! गंगा में इफ्तार के वायरल वीडियो में ‘बिरयानी’ तलाश रही पुलिस?
वाराणसी: गंगा की लहरों पर इफ्तार या सियासत? भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष के आरोप पर कोतवाली पुलिस की 'सुपरफास्ट' कार्रवाई, नाव चालक समेत 14 गिरफ्तार। वीडियो में फल-खजूर, पर तहरीर में 'बिरयानी' का दावा। क्या दबाव में हुई गिरफ्तारी? PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): धर्म और आस्था की नगरी काशी में गंगा नदी में इफ्तार पार्टी करना 14 युवकों और एक नाविक को भारी पड़ गया है। कोतवाली पुलिस की एक ऐसी कार्रवाई सामने आई है जिसने शहर में नई बहस छेड़ दी है। आरोप है कि सत्ताधारी दल के दबाव में पुलिस ने बिना किसी साक्ष्य या फॉरेंसिक जांच के, केवल आरोपों के आधार पर त्वरित गिरफ्तारी कर डाली।
1. क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें कुछ युवक गंगा नदी में नाव पर बैठकर इफ्तार कर रहे हैं। इस वीडियो को आधार बनाकर भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने कोतवाली में तहरीर दी।
- आरोप: तहरीर में कहा गया कि युवक नाव पर बैठकर ‘नॉनवेज/बिरयानी’ खा रहे थे और हड्डियां गंगा में फेंक रहे थे, जिससे करोड़ों हिंदुओं की आस्था आहत हुई है।
- पुलिस की कार्रवाई: तहरीर मिलते ही पुलिस ने आनन-फानन में नाव चालक समेत 14 लोगों को दबोच लिया।
2. वायरल वीडियो बनाम पुलिस की एफआईआर
PNN24 ने जब वायरल वीडियो का बारीकी से विश्लेषण किया, तो तस्वीर कुछ और ही नजर आई:
- वीडियो का सच: वीडियो में बिछे दस्तरखान पर फल, पकौड़ी, घुघनी और खजूर साफ देखे जा सकते हैं, जो विशुद्ध रूप से शाकाहारी (Veg) हैं।
- गायब है बिरयानी: वीडियो में कहीं भी मांस या हड्डियां फेंकने के स्पष्ट साक्ष्य प्रथम दृष्टया नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस ने गिरफ्तारी से पहले खाने के नमूनों की जांच कराई?
3. गंभीर धाराओं का ‘जाल’
पुलिस ने इस मामले में न केवल बीएनएस (BNS) की धाराएं लगाई हैं, बल्कि जल प्रदूषण अधिनियम का भी सहारा लिया है:
- धाराएं: BNS 298, 299 (धार्मिक भावनाएं आहत करना), 196(1)(b) (शत्रुता बढ़ाना), 270, 279, 223(b) और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम 1974 की धारा 24।
- लाइसेंस रद्द करने की मांग: भाजपा नेता ने नाविक का लाइसेंस रद्द करने की भी मांग की है, जिससे गरीब नाविक के परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
4. दबाव की सियासत या कानून का राज?
शहर के जागरूक नागरिकों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच यह गिरफ्तारी चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
- बड़ा सवाल: क्या वाराणसी पुलिस केवल ‘सत्ता पक्ष’ के कहने पर बिना जांच किए किसी को भी सलाखों के पीछे भेज देगी?
- पक्षपात का आरोप: लोगों का कहना है कि अगर इफ्तार में परोसा गया खाना शाकाहारी था, तो क्या गंगा में नौका विहार करते समय खाना खाना अब अपराध की श्रेणी में आता है?
📊 केस फाइल: एक नज़र में (The Case Summary)
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | गंगा नदी, कोतवाली क्षेत्र, वाराणसी |
| तहरीरकर्ता | रजत जायसवाल (अध्यक्ष, भाजपा युवा मोर्चा, महानगर) |
| गिरफ्तारी | 14 युवक (नाविक समेत) |
| मुख्य आरोप | गंगा में नॉनवेज खाना और हड्डियां फेंकना |
| विवाद का केंद्र | बिना जांच और साक्ष्य के ‘त्वरित कार्रवाई’ |
📌 PNN24 का नजरिया:
गंगा सबकी है और उसकी शुचिता बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। लेकिन क्या किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता के कहने पर पुलिस को अपनी ‘तफ्तीश’ का चश्मा उतार देना चाहिए? कानून की नजर में सब बराबर होने चाहिए, चाहे वो शिकायतकर्ता हो या आरोपी। बिना साक्ष्य के गिरफ्तारी न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता पर भी कालिख पोतती है।











