‘इफ्तार पिकनिक नहीं, इबादत है; इन जाहिलों ने इस्लाम को बदनाम किया’; गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी पर अंजुमन इन्तेज़ामिया कमेटी का बड़ा बयान

"इफ्तार कोई पिकनिक नहीं": गंगा में नाव पर इफ्तार करने वालों पर बरसे अंजुमन इन्तेज़ामिया के एसएम यासीन। गिरफ्तारी को 'शोषण' बताया, लेकिन युवकों के कृत्य को 'जाहिलाना' और इस्लाम को बदनाम करने वाला करार दिया। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

ईदुल अमीन

वाराणसी (PNN24 News): गंगा की लहरों पर इफ्तार करने वाले 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी के मामले में अब मुस्लिम समाज के भीतर से ही तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली संस्था अंजुमन इन्तेज़ामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है। उन्होंने जहाँ एक तरफ पुलिसिया कार्रवाई को ‘शोषण’ बताया, वहीं दूसरी तरफ इन युवकों को ‘जाहिल’ करार देते हुए उनके कृत्य को गैर-इस्लामी बताया।

1. “इफ्तार सैर-सपाटा नहीं, शुद्ध धार्मिक कार्य”

एसएम यासीन ने अपने बयान में युवकों की मंशा और उनके तरीके पर गंभीर सवाल उठाए।

  • इस्लाम में जगह नहीं: यासीन ने कहा, “आज ज्ञात हुआ कि कुछ जाहिल नाव पर रोज़ा इफ्तार कर रहे थे। इस्लाम में इसके लिए कहीं जगह नहीं है। इफ्तार एक शुद्ध धार्मिक कार्य है, यह कोई सेल (सैर) या पिकनिक नहीं है।”
  • नमाज़ की अनिवार्यता: उन्होंने तर्क दिया कि इफ्तार के तुरंत बाद मग़रिब की नमाज़ ज़रूरी होती है, जो नाव पर संभव नहीं है। ऐसे में यह केवल मनोरंजन का ज़रिया बनकर रह गया।

2. “परिजनों की तरबियत पर सवाल”

एसएम यासीन ने इन युवकों के पालन-पोषण और धार्मिक शिक्षा (तरबियत) पर भी चोट की।

  • जाहिलाना कृत्य: “इन जाहिलों को इनके घर वालों ने क्या तरबियत दी है? इन लोगों ने इस्लाम मज़हब को बदनाम करने का मौका दिया है। इस कृत्य की जितनी भी निंदा की जाए, कम है।”
  • उलेमाओं से अपील: उन्होंने शहर के आलिमों और विद्वानों से भी इस विषय पर अपनी राय साझा करने की अपील की है।

3. गिरफ्तारी पर भी घेरा: “भाजपा को मिला मौका”

एक तरफ जहाँ उन्होंने युवकों को कोसा, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं की नीयत पर भी सवाल उठाए।

  • शोषण का आरोप: उन्होंने कहा, “बेशक यह मुसलमानों का शोषण करने के लिए एफआईआर हुई है, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन भाजपा और उनके कार्यकर्ताओं को ऐसा मौका आखिर इन जैसे जाहिल लोगों से ही तो मिलता है, और मिल गया।”

4. खबर से पहुंची तकलीफ

एसएम यासीन ने इस पूरी घटना को ‘बेहद तकलीफदेह’ बताया। उन्होंने माना कि ऐसी हरकतों से समाज की छवि धूमिल होती है और राजनीतिक दलों को ध्रुवीकरण का हथियार मिल जाता है।

📌 PNN24 विश्लेषण:

एसएम यासीन का यह बयान इस मामले को एक नया आयाम देता है। जहाँ एक तरफ प्रशासन इसे ‘आस्था के अपमान’ से जोड़ रहा है, वहीं मुस्लिम समुदाय के बड़े नेता इसे ‘मज़हब के अपमान’ और ‘जाहिलियत’ से जोड़ रहे हैं। यह बयान उन लोगों के लिए भी एक संदेश है जो धार्मिक आयोजनों को सोशल मीडिया पर दिखावे या मनोरंजन का साधन बना रहे हैं।

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