‘दालमंडी की बिटिया “शाकरह” ने सीबीएसई में गाड़े सफलता के झंडे: 10वीं में 97% अंकों के साथ रोशन किया काशी का नाम; बनना चाहती हैं IPS ऑफिसर!’
वाराणसी की बेटी का कमाल! दालमंडी की शाकरह शाहिद ने सीबीएसई 10वीं बोर्ड में 97% अंक हासिल कर लहराया परचम। सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल की छात्रा का सपना है IPS बनकर देश की सेवा करना। विदेश में रहकर मेहनत कर रहे पिता और घर पर तालीम दे रही मां को दिया सफलता का श्रेय। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

ईदुल अमीन
वाराणसी (PNN24 News): सीबीएसई बोर्ड की 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम घोषित होते ही वाराणसी के दालमंडी इलाके में जश्न का माहौल है। क्षेत्र की रहने वाली होनहार छात्रा शाकरह शाहिद ने 97 प्रतिशत अंक हासिल कर यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे बुलंद हों और मेहनत सच्ची, तो सफलता कदम चूमती है। सेन्ट्रल हिन्दू गर्ल्स स्कूल की इस मेधावी छात्रा की उपलब्धि से उनके परिवार और पूरे इलाके का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है।
1. माता-पिता की मेहनत और तालीम का फल
शाकरह शाहिद के पिता, मोहम्मद शाहिद, अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए विदेश में रहकर कठिन परिश्रम करते हैं, जबकि उनकी मां एक कुशल गृहणी हैं जिन्होंने शाकरह की तालीम और परवरिश पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। शाकरह अपनी इस शानदार सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा, “मेरे पिता की दिन-रात की मेहनत और मेरी मां की दी हुई तालीम ने ही मुझे आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। यह सब मेरे बड़ों की दुआओं का नतीजा है।”
2. भविष्य का लक्ष्य: देश सेवा के लिए IPS बनने का सपना
परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद शाकरह के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए शाकरह ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य यहीं रुकना नहीं है। वह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर एक IPS अधिकारी के तौर पर देश की सेवा करना चाहती हैं। उनकी इस सोच ने समाज के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का काम किया है।
आज दालमंडी की तंग गलियों से निकलकर एक बिटिया ने आसमान को छू लिया है; ये 97 फीसद सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि सात समुंदर पार बैठे एक बाप के पसीने की चमक है! आज के दौर में जब लोग बहाने ढूंढते हैं, तब दालमंडी की इस बिटिया ने चुपचाप अपनी किताबों से क्रांति लिख दी। बाप विदेश में हाड़तोड़ मेहनत कर रहा है ताकि घर में चिराग जले, और बेटी ने उस पसीने की कीमत 97 फीसद अंक लाकर चुका दी। सपने देखने के लिए महल नहीं, हौसला चाहिए। काशी की इन गलियों में हुनर की कोई कमी नहीं है, बस सही तालीम मिल जाए तो शाकरह जैसी बेटियाँ खाकी वर्दी पहनकर समाज का चेहरा बदल सकती हैं।
इस मौके पर शाकरह शाहिद के पिता के बचपन के मित्र तारिक आज़मी (Tariq Azmi) ने गौरवपूर्ण अंदाज़ में कहा कि ‘बिटिया ने आज सीना चौड़ा कर दिया है। तंग गलियों में जब ज़िन्दगी की जद्दोजेहद इंसानियत कर रही है, उस वक्त बिटिया ने अपने हौसले बुलंद रखते हुवे खुद को किताबो में उलझाए रखा, इंशा अल्लाह उसको आगे भी ऐसी ही कामयाबी मिलेगी और उसका आईपीएस बनने का सपना साकार होगा।’
PNN24 News की ओर से शाकरह शाहिद और उनके पूरे परिवार को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनाएं। बिटिया, तुम इसी तरह काशी और देश का नाम रोशन करती रहो!












