‘वाराणसी पुलिस की “विशालकाय” कार्रवाई: नशे के कारोबार के खिलाफ कोर्ट में 38,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल; किंगपिन शुभम जयसवाल और भोला जयसवाल सहित 18 तस्करों पर कसा शिकंजा; मुख्य सरगना शुभम अब भी फरार!’

वाराणसी पुलिस का नशे के सौदागरों पर 'हथौड़ा'! कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी मामले में कोतवाली पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की 38,000 पन्नों की विशालकाय चार्जशीट। 18 अभियुक्त नामजद, मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल अब भी फरार। जानिए काशी ज़ोन पुलिस की इस ऐतिहासिक कार्रवाई की पूरी डिटेल। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी (Tariq Azmi)

वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी कमिश्नरेट की कोतवाली पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और विस्तृत कानूनी कार्रवाई को अंजाम दिया है। कोडीनयुक्त ‘न्यू फेंसेडिल’ कफ सिरप की तस्करी और अवैध बिक्री से जुड़े एक संवेदनशील मामले में पुलिस ने माननीय न्यायालय में लगभग 38,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर अपराधियों के होश उड़ा दिए हैं।

1. केस डायरी: 38 हज़ार पन्ने और 18 अभियुक्त

यह मामला थाना कोतवाली में मुकदमा संख्या 235/2025 के तहत दर्ज है। पुलिस आयुक्त के अपराध नियंत्रण अभियान के तहत की गई इस लंबी जांच में कोडीन सिंडिकेट के हर तार को खंगाला गया है।

  • कानूनी धाराएं: आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21/29/27ए और बीएनएस (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत शिकंजा कसा गया है।

  • प्रमुख नाम: इस चार्जशीट में कुल 18 अभियुक्तों को नामजद किया गया है। इनमें भोला प्रसाद, प्रतीक मिश्रा, विशाल कुमार सोनकर समेत 17 आरोपी पुलिस की रडार पर हैं, जबकि गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल (निवासी आदमपुर) अभी भी फरार है, जिसे पुलिस ने भगोड़ा घोषित कर दिया है।

2. “काशी ज़ोन” पुलिस की बड़ी कामयाबी

पुलिस उपायुक्त काशी ज़ोन और अपर पुलिस उपायुक्त के निर्देशन में सहायक पुलिस आयुक्त (कोतवाली) और प्रभारी निरीक्षक की टीम ने साक्ष्यों का ऐसा पहाड़ खड़ा किया है कि अपराधियों का बचना मुश्किल लग रहा है। 38,000 पन्नों की इस चार्जशीट में डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय लेन-देन और तस्करी के पूरे रूट मैप का विस्तृत विवरण शामिल है।

3. फरार अभियुक्त पर इनाम और दबिश

पुलिस के अनुसार, शुभम जायसवाल इस पूरे अवैध नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नशे के इस कारोबार में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।


📝 काका का नज़रिया:

“बबुआ, जब पाप का घड़ा भर जाता है, तो चार्जशीट के ‘पन्ने’ नहीं, बल्कि ‘पहाड़’ निकलते हैं। 38 हज़ार पन्ने का मतलब है कि पुलिस ने अपराधियों की सांस लेने तक का हिसाब लिख दिया है!”

आज रात वाराणसी पुलिस की इस मैराथन चार्जशीट पर काका ने बड़े ही दार्शनिक अंदाज़ में बात रखी।

काका बोले: “बबुआ, काशी की पुलिस ने आज बता दिया कि अगर ठान ले, तो अपराधी पाताल में भी सुरक्षित नहीं है। 38,000 पन्नों की फाइल का बोझ तो अपराधी सह नहीं पाएगा। कफ सिरप के नाम पर ज़हर बेचने वालों ने सोचा था कि गलियों के मोड़ पर बच निकलेंगे, पर कोतवाली पुलिस ने तो पूरी ‘किताब’ ही लिख दी। अब बस इंतज़ार है कि भगोड़ा शुभम कब हत्थे चढ़ता है। तुम्हे भी तो इसी ने अपने गुर्गो के साथ मिल कर झूठे मुकदमा में फसाया था, देख बबुआ…! अल्लाह की लाठी में आवाज़ नहीं होती है, मगर पड़ती बड़ी जोर से है..!”

मैंने पूछा— “काका, इतनी बड़ी चार्जशीट का क्या असर होगा?”

काका का जवाब: “असर ई होगा बबुआ कि अब ‘तारीख पे तारीख’ वाला खेल नहीं चलेगा। जब सबूत इतने पुख्ता और विस्तृत हों, तो इंसाफ की चक्की तेज़ी से घूमती है। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, नशे की ई पाठशाला बंद करने के लिए ऐसी ही सख्त कलम की ज़रूरत थी’। कोतवाली पुलिस की टीम को इस मेहनत के लिए शाबाशी मिलनी चाहिए।”


📊 केस फाइल: एक नज़र में (Action Statistics)

विवरण जानकारी
मुकदमा संख्या 235/2025 (थाना कोतवाली)
कुल पन्ने (Chargesheet) लगभग 38,000
कुल नामजद अभियुक्त 18
मुख्य भगोड़ा शुभम जायसवाल (आदमपुर निवासी)
प्रमुख बरामदगी/आरोप कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी
तारिक आज़मी (Tariq Azmi)
प्रधान सम्पादक

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