‘दालमंडी चौड़ीकरण: 6 मस्जिदों पर मंडराते संकट के बीच “अंजुमन इंतज़ामिया” की बड़ी बैठक; वक़्फ़ बोर्ड के कार्यकाल पर फँसा पेंच; उलेमा बोले— “अभी अंतिम निर्णय का इंतज़ार”!’

वाराणसी: दालमंडी चौड़ीकरण की ज़द में आ रहीं 6 मस्जिदें और वक़्फ़ संपत्तियाँ। अंजुमन इंतज़ामिया मसाजिद की अहम बैठक में उलेमा, सरदार और सामाजिक संगठनों ने की चर्चा। वक़्फ़ बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने से बढ़ीं कानूनी पेचीदगियां। शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी

वाराणसी (PNN24 News): शासन के निर्देशानुसार दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर वाराणसी में प्रशासनिक हलचल तेज़ हो गई है। इस परियोजना की ज़द में दालमंडी क्षेत्र की लगभग 6 मस्जिदें और कई औक़ाफ़ संपत्तियाँ आ रही हैं, जिनमें नई सड़क स्थित प्रसिद्ध लंगड़े हाफ़िज़ मस्जिद भी शामिल है। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए रविवार (26 अप्रैल 2026) सायंकाल अंजुमन इंतज़ामिया मसाजिद द्वारा एक महत्वपूर्ण परामर्श बैठक आयोजित की गई।

1. वक़्फ़ बोर्ड और कानूनी पेचीदगियाँ

बैठक में जानकारी दी गई कि जिला प्रशासन ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड से पत्राचार किया था। लेकिन वर्तमान में बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के कारण वह कोई भी औपचारिक सहमति देने की स्थिति में नहीं है। वक़्फ़ अधिनियम की धाराओं के आलोक में बोर्ड ने 23 अप्रैल 2026 को प्रशासन को अपना उत्तर भेज दिया है। ऐसी स्थिति में प्रशासन अब मुतवल्लियों से सहयोग की अपेक्षा कर रहा है।

2. उलेमा और बुनकर सरदारों का महामंथन

हज़रत मौलाना ज़कीउल्लाह क़ादरी साहब (मुख्य इमाम, लंगड़े हाफ़िज़ मस्जिद) की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शहर के इमाम, उलेमा-ए-किराम, बुनकर संगठनों के सरदार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

  • बकरीद और संवेदनशीलता: बैठक में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि आगामी बकरीद का त्यौहार निकट है, ऐसे में अवाम की भावनाओं और धार्मिक मर्यादाओं का ध्यान रखना प्राथमिकता है।
  • अगली बैठक जल्द: अभी तक इस मामले में संबंधित ‘फ़तवे’ प्राप्त नहीं हुए हैं और कुछ वरिष्ठ सदस्य अनुपस्थित थे, इसलिए सर्वसम्मति से तय हुआ कि जल्द ही एक और विस्तृत बैठक बुलाई जाएगी।

3. गंगा-जमुनी तहज़ीब की अपील

अंजुमन इंतज़ामिया और उपस्थित उलेमाओं ने अवाम से पुरज़ोर अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफ़वाहों का शिकार न हों। शहर की शांति और सौहार्द (अमन-ओ-अमान) बनाए रखने के लिए बिना पुष्टि के किसी भी बयानबाज़ी से बचने की सलाह दी गई है।


📝 मोरबत्तियाँ (लेखक: तारिक आज़मी Tariq Azmi)

काका का नज़रिया: “बबुआ, शहर की सड़कें चौड़ी करना और इबादतगाहों की दीवारों को बचाना, दोनों ही ‘ईमान’ और ‘इंतज़ाम’ की परीक्षा है!”

आज दालमंडी की इस अहम बैठक और वक़्फ़ बोर्ड की पेचीदगियों पर अस्सी घाट की अड़ी पर काका ने बड़े ही सुलझे हुए अंदाज़ में बात रखी।

काका बोले: “बबुआ, दालमंडी की वो गलियाँ सिर्फ़ रास्ता नहीं हैं, बनारस की धड़कन हैं। अब प्रशासन चौड़ीकरण की बात कर रहा है और 6 मस्जिदें उस ज़द में हैं, तो फिक्र लाज़मी है। वक़्फ़ बोर्ड का कार्यकाल खत्म होना आग में घी का काम कर रहा है, क्योंकि अब फैसला लेने वाला कोई बड़ा ‘साहब’ लखनऊ में नहीं बैठा। मौलाना ज़कीउल्लाह साहब ने सबको बुलाकर जो मशविरा किया, वही बनारस की पुरानी रीत है।”

मैंने पूछा— “काका, क्या अगली बैठक में कोई रास्ता निकलेगा?”

काका का जवाब: “निकलना ही चाहिए बबुआ! जब तक उलेमाओं के फ़तवे और कानून के जानकारों की राय नहीं आती, तब तक कोई भी कदम उठाना जल्दबाज़ी होगी। बकरीद भी पास है, तो सुकून बनाए रखना सबकी ज़िम्मेदारी है। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, शहर विकास से चमकता है, लेकिन सुकून से ज़िंदा रहता है’। अफ़वाहों की हवाओं को दुआओं से रोकने का वक़्त है।”


📊 बैठक का सार: मुख्य बिंदु (Meeting Summary)

विवरण जानकारी
दिनांक 26 अप्रैल 2026 (सायंकाल)
अध्यक्षता मौलाना ज़कीउल्लाह क़ादरी साहब
प्रमुख मुद्दा 6 मस्जिदों का चौड़ीकरण परियोजना में शामिल होना
कानूनी अड़चन यूपी सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होना
मुख्य निर्णय फ़तवे और अन्य सदस्यों के परामर्श हेतु पुनः बैठक होगी
अपील शांति बनाए रखें और अफ़वाहों से बचें

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *