‘दालमंडी चौड़ीकरण: “मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़” पर प्रशासनिक हलचल के बीच अंजुमन इंतेजामिया की अपील; एसएम यासीन बोले— “अफवाहों से बचें, सब्र और दुआ का दामन थामें”!’
वाराणसी: दालमंडी सड़क चौड़ीकरण की ज़द में 'मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़'। नजूल की ज़मीन के दावे और 20 फीट हिस्से पर प्रशासन की नज़र के बीच अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने तोड़ी चुप्पी। एसएम यासीन ने शहरवासियों से 'सब्र और अमन' की अपील की। वक्फ दस्तावेज़ों की जांच जारी। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी के हृदय स्थल दालमंडी क्षेत्र में चल रही सड़क चौड़ीकरण की प्रशासनिक कवायद के बीच ‘मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़’ को लेकर विवाद गहराता नज़र आ रहा है। प्रशासन द्वारा मस्जिद के लगभग 20 फीट हिस्से को चौड़ीकरण की ज़द में बताए जाने और कुछ ज़मीन के ‘नजूल’ होने के दावों के बीच, मस्जिद की देखरेख करने वाली संस्था अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है।
1. एसएम यासीन की भावुक और अमन की अपील
कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने एक बयान जारी कर शहर के मुसलमानों और धर्मनिरपेक्ष लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा, “हम इस वक्त एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि हम ज्यादा से ज्यादा दुआ करें कि अल्लाह हमारी जान, माल और इबादतगाहों की हिफाजत फरमाए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे मुश्किल वक्त में जल्दबाजी या गलत कदम उठाना नुकसानदेह साबित हो सकता है।
2. कागजातों और फतवों का लिया जा रहा सहारा
मस्जिद के कानूनी पक्ष को लेकर एसएम यासीन ने जानकारी दी कि कमेटी ‘मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़’ से संबंधित वक्फ और मालिकाना हक के कागजातों का बारीकी से मुआयना कर रही है। इस सिलसिले में:
- शहर के बुजुर्गों और प्रतिष्ठित नागरिकों (मुअज़्ज़िज़ीन) से मशवरा लिया जा रहा है।
- धार्मिक विशेषज्ञों से फतवे हासिल किए जा रहे हैं।
- कानून के जानकारों और वकीलों से मशविरा जारी है ताकि प्रशासनिक दावों का तथ्यपरक जवाब दिया जा सके।
3. प्रशासन से ‘वक्फ ऑफिस’ के जवाब का इंतज़ार करने की गुज़ारिश
एसएम यासीन ने जिला प्रशासन से ‘दस्त-बस्ता’ गुज़ारिश की है कि वे लखनऊ स्थित वक्फ ऑफिस के जवाब का अक्षरशः पालन करें। उन्होंने अपील की कि प्रशासन बिना किसी दबाव या जल्दबाजी के मामले की जांच करे, ताकि शहर के अमन-ओ-अमान (शांति व्यवस्था) में कोई खलल न पड़े।
4. “अफवाहों के हथकंडों से सावधान रहें”
कमेटी ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि कुछ विरोधी तत्व अफवाहें फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। कमेटी ने स्पष्ट किया कि मामला फिलहाल कानूनी और कागजी प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए जनता केवल आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करे।
📝 विशेष कॉलम: मोरबत्तियाँ (लेखक: तारिक आज़मी Tariq Azmi)
काका का नज़रिया: “बबुआ, शहर के विकास की पटरी जब किसी ‘इबादतगाह’ के करीब से गुजरती है, तो रफ़्तार से ज़्यादा ‘रिश्तों’ और ‘दस्तावेजों’ की मज़बूती की ज़रूरत होती है!”
आज दालमंडी और मस्जिद के इस संवेदनशील मामले पर काका ने बड़े ही गंभीर अंदाज़ में चर्चा की।
काका बोले: “बबुआ, दालमंडी बनारस की रगों की तरह है, पतली गलियां और पुरानी यादें। अब चौड़ीकरण की बात हो रही है, तो ‘लंगड़े हाफ़िज़’ मस्जिद का ज़िक्र भी आ गया। एसएम यासीन साहब ने ‘सब्र’ की जो बात कही है, वही इस वक्त की सबसे बड़ी दवा है। कानून का रास्ता ही सबसे सही रास्ता होता है। जब बात वक्फ और नजूल की फँसती है, तो कागज़ ही गवाही देते हैं।”
मैंने पूछा— “काका, क्या प्रशासन और कमेटी के बीच बातचीत से रास्ता निकलेगा?”
काका का जवाब: “निकलना ही चाहिए बबुआ! बनारस की तहजीब ही यही है कि यहाँ बड़े-बड़े मसले चाय की चुस्की और मेज़ पर बैठकर सुलझ जाते हैं। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, शहर का विकास भी ज़रूरी है और विरासत की हिफाज़त भी’। बस दुआ करिए कि जो भी हो, वो शहर की शांति के हक में हो। अफवाहों पर कान देना छोड़िए, बनारस पहले भी एकजुट था और आगे भी रहेगा।”
📊 मामला: एक नज़र में (Current Status Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| स्थल | मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़, दालमंडी, वाराणसी |
| विवाद का विषय | सड़क चौड़ीकरण में 20 फीट हिस्सा और नजूल ज़मीन का दावा |
| मुख्य पक्ष | जिला प्रशासन बनाम अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद |
| कमेटी की अपील | सब्र, दुआ और अफवाहों से बचने की गुज़ारिश |
| वर्तमान स्थिति | कागजातों की जांच और वक्फ बोर्ड लखनऊ के जवाब का इंतज़ार |












