‘वाराणसी कफ सिरप कांड में “मनी लॉन्ड्रिंग” का बड़ा खेल: सपा नेता के भतीजे की गिरफ्तारी के बाद महिलाओं के नाम आए सामने; शराब के ठेकों से “सफेद” हो रहा था काला धन; मास्टरमाइंड शुभम अब भी फरार!’
वाराणसी: कफ सिरप तस्करी से शराब के ठेकों तक फैला 'काले धन' का साम्राज्य! सपा नेता प्रदीप जायसवाल के भतीजे वैभव की गिरफ्तारी के बाद मनी लॉन्ड्रिंग के सिंडिकेट का भंडाफोड़। कफ सिरप की कमाई से महिलाओं के नाम पर खोले गए शराब के ठेके। पुलिसिया रेड और कोर्ट की कार्रवाई पर PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी के चर्चित कोडीन कफ सिरप तस्करी मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सफेदपोशों और उनके रिश्तेदारों के काले कारनामों की नई परतें खुल रही हैं। समाजवादी पार्टी व्यापार सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल के भतीजे वैभव जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद अब यह मामला करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग तक पहुँच गया है।
1. कफ सिरप की कमाई, शराब के ठेकों में निवेश
पुलिस की पड़ताल में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि कफ सिरप तस्करी के जरिए होने वाली अवैध कमाई को शराब के कारोबार में खपाया जा रहा था।
- सिंडिकेट का खेल: सोनभद्र जेल में बंद भोला जायसवाल ने वैभव जायसवाल की मां राधिका और पत्नी शिवांगी समेत पांच महिलाओं के नाम पर लॉटरी सिस्टम के जरिए शराब के ठेके दिलवाए थे।
- ब्लैक टू व्हाइट: इन ठेकों का इस्तेमाल ‘काले धन’ को ‘सफेद’ करने के लिए एक मशीन की तरह किया जा रहा था।
2. पुलिसिया कार्रवाई और कोर्ट का रुख
एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने वैभव की मां, पत्नी और तीन अन्य महिलाओं (उषा देवी, रेखा देवी और बबिता सिंह) को गिरफ्तार कर न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया।
- रिमांड की मांग: पुलिस ने 14 दिनों की न्यायिक रिमांड मांगी थी।
- कोर्ट का फैसला: हालांकि, देर शाम हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने साक्ष्यों और विभिन्न पहलुओं पर विचार करते हुए सभी पांचों महिलाओं को कोर्ट से ही रिहा कर दिया।
3. सपा नेता की फोटो और रडार पर रिश्तेदार
इस मामले में राजनीति और अपराध का गठजोड़ भी चर्चा में है। सपा नेता प्रदीप जायसवाल की फोटो कफ सिरप माफिया शुभम जायसवाल के साथ वायरल होने के बाद से ही पूरा परिवार और कई करीबी रिश्तेदार पुलिस की रडार पर हैं। पुलिस को संदेह है कि वैभव जायसवाल के ‘आंवला कारोबार’ की आड़ में ब्लैक मनी को व्हाइट करने का एक बड़ा सिंडिकेट चल रहा था।
ई माफिया लोग भी बड़े कलाकार हैं। एक तरफ ज़हर (कफ सिरप) बेचकर लोगों की नसें सुखा रहे हैं, और दूसरी तरफ उसी पैसे से शराब के ठेके खोलकर अपनी तिजोरी भर रहे हैं। वैभव बाबू पकड़े गए तो पता चला कि घर की महिलाएं भी कागजों पर ‘ठेकेदार’ बनी बैठी हैं। ई ‘ब्लैक मनी’ को ‘व्हाइट’ करने का तरीका तो किसी डिग्री होल्डर को भी नहीं पता होगा।
कानून तो सबूत मांगता है। पुलिस ने अपनी चाल चली, पर कोर्ट ने साक्ष्यों की कमी देखी होगी। पर असली सवाल तो ‘मास्टरमाइंड’ शुभम जायसवाल पर है, जो अभी भी पुलिस की आँखों में धूल झोंककर फरार है। जब तक वो हाथ नहीं आता, तब तक ई सिंडिकेट की असली जड़ें नहीं कटेंगी। ‘साहब, जाँच ऐसी करो कि सिर्फ मोहरे न गिरें, बल्कि शतरंज बिछाने वाला भी सलाखों के पीछे हो’।”
📊 केस डायरी: कफ सिरप मनी लॉन्ड्रिंग (Key Findings)
| मुख्य किरदार | भूमिका / आरोप | वर्तमान स्थिति |
| वैभव जायसवाल | सपा नेता का भतीजा, मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपी | पुलिस गिरफ्त में |
| भोला जायसवाल | शैली ट्रेडर्स का प्रोपराइटर, सिंडिकेट संचालक | सोनभद्र जेल में बंद |
| शुभम जायसवाल | कफ सिरप तस्करी का मास्टरमाइंड | फरार |
| महिला अनुज्ञापी | शराब ठेकों के जरिए ब्लैक मनी व्हाइट करना | कोर्ट से रिहा |











