‘वाराणसी में खाकी का “अपमान”: बीच चौराहे पर ट्रैफिक सिपाही को पीटा; रसूखदारों ने दिखाई सत्ता की धौंस; क्या पुलिस कमिश्नर के “इकबाल” पर भारी पड़ेगा राजनीतिक दबाव?’
वाराणसी के चंद्रा चौराहे पर पुलिस के 'इकबाल' को बड़ी चुनौती! ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक सिपाही की बाहुबली युवकों ने की बेरहमी से पिटाई। सत्ता पक्ष का रसूख और मंत्री की धौंस दिखाने का आरोप। सारनाथ पुलिस और स्थानीय सूत्रों के दावों में उलझा 'आंकड़ा'। क्या कमिश्नर मोहित अग्रवाल लेंगे सख्त एक्शन? PNN24 की विशेष पड़ताल।

तारिक आज़मी
वाराणसी (PNN24 News): धर्मनगरी वाराणसी में ‘आपकी सुरक्षा में सदैव तत्पर’ रहने वाली पुलिस खुद कितनी सुरक्षित है, इसका एक शर्मनाक उदाहरण सारनाथ थाना क्षेत्र के चंद्रा चौराहे पर देखने को मिला। यहाँ सरेराह कुछ दबंग युवकों ने ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक सिपाही नितेश कुमार की बेरहमी से पिटाई कर दी। घटना के बाद से ही इलाके में तनाव है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
1. ड्यूटी पर हमला और रसूख की धौंस
जानकारी के अनुसार, ट्रैफिक सिपाही नितेश कुमार चंद्रा चौराहे पर यातायात सुचारू करा रहे थे। इसी दौरान कुछ युवकों से कहासुनी हुई और देखते ही देखते युवकों ने कानून को हाथ में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक खुद को सत्ता पक्ष के बेहद करीबी बता रहे थे और मौके पर एक ‘मंत्री’ का नाम लेकर पुलिसकर्मियों को धमका रहे थे।
2. पुलिस के आंकड़ों में विरोधाभास: 2 या 4?
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
- स्थानीय सूत्र: सूत्रों का दावा है कि पुलिस ने मौके से 4 युवकों को हिरासत में लिया है।
- थाना प्रभारी (सारनाथ): PNN24 न्यूज़ से हुई टेलीफोनिक बातचीत में थाना प्रभारी ने केवल 2 युवकों को हिरासत में लेने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि वह स्वयं पास के पंचकोसी चौराहे पर मौजूद थे और फिलहाल मामले की तफ्तीश जारी है।
3. मैनेज करने का खेल शुरू?
वाराणसी पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल अपराधियों पर नकेल कसने की बात करते हैं, लेकिन यहाँ मामला सत्ता पक्ष से जुड़ा होने के कारण चर्चा है कि ‘सुलह-सपाटे’ की कोशिशें तेज हो गई हैं। सवाल यह है कि क्या सरेआम सिपाही को पीटने वालों पर सिर्फ ‘शांति भंग’ की धाराएं लगेंगी या पुलिस अपनी वर्दी का सम्मान बचाने के लिए कोई कठोर कदम उठाएगी?
📝 काका का नज़रिया:
“बबुआ, जब रक्षक ही भक्षक के सामने बेबस हो जाए और ‘मंत्री’ का नाम लेते ही कानून की लाठी कांपने लगे, तो समझो कि शहर का ‘इकबाल’ खतरे में है!”
आज रात चंद्रा चौराहे के इस ‘दबंग कांड’ पर काका ने अपना हुक्का पटकते हुए कड़ा रुख अपनाया।
काका बोले: “बबुआ, आज तो हद ही हो गई! बनारस की गलियों में दरोगा जी का खौफ हुआ करता था, और आज चौराहे पर सिपाही मारा जा रहा है। वो भी तब, जब थानेदार साहब बगल वाले चौराहे पर मौजूद थे। ई जो ‘सत्ता का नशा’ है न, ई अच्छे-अच्छों की मति भ्रष्ट कर देता है। मंत्री जी का नाम लेकर सिपाही को पीटना सीधे-सीधे पुलिस कमिश्नर की कुर्सी को चुनौती देना है।”
मैंने पूछा— “काका, क्या पुलिस दबाव में काम कर रही है?”
काका का जवाब: “बबुआ, सूत्रों की मानें तो 4 पकड़े गए, थानेदार कह रहे हैं 2। ई ‘दो’ का अंतर ही बता रहा है कि पीछे से ‘मैनेज’ करने वाला फोन घनघना रहा है। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, अगर आज सिपाही को इंसाफ नहीं मिला, तो कल कोई भी गुंडा खाकी पर हाथ डाल देगा’। अब देखना है कि मोहित अग्रवाल साहब खाकी की लाज बचाते हैं या रसूख की जीत होती है।”












