‘वाराणसी पुलिस की “नाक” के नीचे लाखों का जुआ: पुरानापुल चौकी इंचार्ज के बगल में सज रही “जायसवाल जी” की फड़; पहरेदारों की फौज और ऑनलाइन पेमेंट का खेल, कमिश्नर साहब वीडियो खुद देख ले, क्या आपका हंटर चलेगा इन “सफेदपोश” जुआरियों पर?’
PNN24 इन्वेस्टिगेशन: वाराणसी के सारनाथ में पुलिस कमिश्नर के आदेशों की धज्जियां। पुराना पुल चौकी से चंद कदमों की दूरी पर चल रहा लाखों का 'जुए का फड़'। सत्ता के संरक्षण का दावा करने वाले 'जायसवाल जी' का काला साम्राज्य। चौकी इंचार्ज के 'महंगे चश्मे' को क्यों नहीं दिखता सरेआम होता यह अपराध? देखिए सबूतों के साथ हमारी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने कार्यभार संभालते ही अपराधियों और भ्रष्टाचारियों को स्पष्ट संदेश दिया था। अपराध रोकने के लिए एसओजी-2 का गठन भी हुआ, जो अपनी कार्यवाहियों की वाह-वाही लूटने में मशगूल है। लेकिन वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र में कमिश्नर साहब के आदेशों की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहाँ ‘कानून का इकबाल’ पुरानापुल चौकी इंचार्ज की ‘रिवाल्विंग चेयर’ के पास आकर दम तोड़ता नज़र आ रहा है।
1. पुरानापुल चौकी से चंद कदम दूर ‘जुए का अड्डा’
सारनाथ थाना क्षेत्र के पंचकोसी पेट्रोल पंप के ठीक सामने, शराब की दुकान के बगल में स्थित एक कटरे में रोज लाखों का जुआ खुल्लम-खुल्ला खेला जा रहा है। PNN24 के पास उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि किस तरह पैसों का अंबार लगा हुआ है और दांव पर लाखों की रकम लगी है।
2. ‘जायसवाल जी’ का ‘सत्ता’ वाला टशन और पहरेदारी
इलाके में ‘जायसवाल जी’ के नाम से मशहूर इस खेल के संचालक खुद को सत्तारूढ़ दल का करीबी बताते हैं। सुरक्षा का आलम यह है कि:
- चार लेयर की सुरक्षा: दो लोग कटरे के अंदर और दो लोग बाहर सड़क पर पहरा देते हैं।
- दिहाड़ी पहरेदार: सूत्रों के अनुसार, इन पहरेदारों को सिर्फ निगरानी के लिए ₹1,000 प्रतिदिन दिए जाते हैं।
- ऑनलाइन पेमेंट: सूत्रों के अनुसार जुआरियों के लिए गाजीपुर से एक बुकी भी आता है, और ऑनलाइन पेमेंट करने पर 2% अतिरिक्त चार्ज वसूला जाता है।
3. दरोगा जी का ‘महंगा चश्मा’ और ठंडी हवा
हैरानी की बात यह है कि जिस कटरे में यह अवैध काम हो रहा है, वह चौकी इंचार्ज की कुर्सी से महज कुछ ही दूरी पर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दरोगा जी गश्त पर तो निकलते हैं, लेकिन शायद उनकी आँखों पर लगा ‘महंगा चश्मा’ उन्हें यह काला कारोबार देखने नहीं देता। चर्चा तो यहाँ तक है कि जब भी मीडिया या कोई सूत्र इस पर सवाल उठाता है, तो पहले से सेटिंग के तहत दो-चार हज़ार की बरामदगी दिखाकर खानापूर्ति कर दी जाती है।
4. एसओजी-2 की जवाबदेही या स्थानीय पुलिस की?
लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एसओजी-2 क्या कर रही है? लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिस दरोगा को उस क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है और जिसे सरकार वेतन दे रही है, उसकी जवाबदेही क्यों तय नहीं की जा रही? क्या चौकी इंचार्ज साहब सिर्फ ठंडी हवा खाने के लिए तैनात हैं?
हमारे काका भी अपना इस खबर पर नजर का चश्मा उतार कर नजरिया दे बैठे
हमारे काका भी हर बात पर ढेर फडफडाते है, हमारे पास आये वीडियो को देख कर एकदम्मे फ़ैल गए कि हम अपना भी नज़रिया देगे, नहीं तो लाठिया तुम्हार खोपडिया पर मार के ‘क्रांति’ लिख देंगे, आखिर हम मजबूर होकर अपने सर की खैर मनाते हुवे बोले बताओ काका अपना भी नज़र का चश्मा हटा कर नज़रियाँ: काका बोले “बबुआ, जहाँ ‘सुलेसन’ चौकी की कुर्सी पर लगा हो और चश्मा ‘नज़रअंदाज़ी’ का, वहाँ कानून तो सिर्फ गरीबों के लिए रह जाता है!”
रात के एक बज रहे हैं, जब मैं (तारिक आज़मी) इस खबर को अंतिम रूप दे रहा हूँ। हमारे सूत्र बता रहे हैं कि ‘जायसवाल जी’ की फड़ अभी भी गुलज़ार है।
काका बोले: “बबुआ, आज हमने वो वीडियो देखा जिसे देखकर कोई भी कह दे कि यहाँ पुलिस की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता। दरोगा जी का चश्मा इतना महंगा है कि उसे लाखों के दांव नहीं दिख रहे, पर अगर कोई गरीब रेहड़ी वाला सड़क पर खड़ा हो जाए तो उसे हटाने में एक मिनट नहीं लगता। ‘मौका मिला तो भ्रष्टाचारी और न मिला तो क्रांतिकारी’— ई कहावत यहाँ फिट बैठती है।”
मैंने पूछा— “काका, क्या इस खबर के बाद कोई कार्यवाही होगी?”
काका का जवाब: “हो सकता है कि कल पुलिस रिपोर्ट भेजे कि ‘कुछ संभ्रांत लोग बैठकर जुआ खेल कर मनोरंजन कर रहे थे, इससे कई बेरोजगारों को चौकीदारी का रोज़गार मिला था, जिन्हें तारिक आज़मी ने बेमतलब बदनाम किया’। पर बबुआ, गूगल की तारीख और वक्त झूठ नहीं बोलते। अगर कमिश्नर साहब तक ई बात पहुँची, तो गाज तो गिरेगी। बस देखना ई है कि गाज उस ‘जायसवाल जी’ पर गिरती है जो सत्ता की ओट में छिपा है, या फिर उन वर्दीधारियों पर जो इस काली कमाई के हिस्सेदार बने बैठे हैं। काशी की जनता सब देख रही है, चश्मा चाहे कितना भी महंगा हो, सच को धुंधला नहीं कर सकता!”
📊 PNN24 Investigation Summary
| विवरण | तथ्य और सबूत |
| स्थान | पंचकोसी पेट्रोल पंप के सामने, शराब की दूकान के बगल में स्थित कटरा, पुलिस चौकी पुरानापुल, थाना सारनाथ (वाराणसी) |
| संचालक | कथित नेता ‘जायसवाल जी’: सूत्र |
| नियम | ₹3,000 प्रति घंटा ‘नाल’, ऑनलाइन भुगतान करने वाले जुआडियो से 2% ऑनलाइन चार्ज: सूत्र |
| सुरक्षा | 4 पहरेदार (₹1,000 प्रतिदिन पर तैनात): सूत्र |
| दूरी | पुलिस चौकी से चंद कदम की दूरी |
| साक्ष्य | वीडियो (वक्त, तारीख और लोकेशन टैग के साथ उपलब्ध) |
नोट: यह खबर प्रकाशित होते समय भी जुआ जारी होने की सूचना हमारे सूत्र दे रहे है। अब देखना यह है कि वाराणसी पुलिस इस ‘खुले खेल’ पर क्या रुख अपनाती है।












