इस्लाम मज़हब के खिलाफ ज़हर उगलने वाला ‘यूट्यूबर “सलीम वास्तिक” निकला मासूम का हत्यारा: 26 साल पहले किशोर की हत्या कर था फरार; पहचान बदलकर बना “एक्स मुस्लिम” अब पहुँचा सलाखों के पीछे!’

दिल्ली क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन! इस्लाम के खिलाफ वीडियो पोस्ट कर चर्चा में आया यूट्यूबर सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान गिरफ्तार। 26 साल पहले 13 वर्षीय किशोर की हत्या का दोषी, जो पहचान बदलकर रह रहा था फरार। पुलिस रिकॉर्ड में 'मृत' घोषित सलीम की कैसे खुली पोल? PNN24 की विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट।

मो0 सलीम संग तारिक आज़मी की मोरबतिया

लोनी/दिल्ली (PNN24 News): यूट्यूब पर ‘एक्स मुस्लिम’ बनकर इस्लाम और इस्लामी रीति-रिवाजों के खिलाफ नफरती वीडियो पोस्ट करने वाले सलीम अहमद उर्फ सलीम वास्तिक को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद जो खुलासा हुआ, उसने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। सलीम वास्तिक कोई साधारण यूट्यूबर नहीं, बल्कि आजीवन कारावास की सजा काट रहा एक हत्यारा है, जो पिछले 26 वर्षों से पुलिस की आँखों में धूल झोंककर अपनी पहचान छिपाए हुए था।

1. 1995 का वो खौफनाक कत्ल

जांच में सामने आया कि सलीम वास्तिक का असली नाम सलीम खान है, जो शामली के नानूपुरा का मूल निवासी है। वर्ष 1995 में उसने अपने साथी अनिल कुमार के साथ मिलकर दिल्ली के गोकुलपुरी निवासी 13 वर्षीय किशोर संदीप बंसल का अपहरण किया था। फिरौती के लिए किए गए इस अपहरण के बाद सलीम ने बच्चे की हत्या कर दी थी। 1997 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन वर्ष 2000 में अंतरिम जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया और तब से पुलिस रिकॉर्ड में उसे ‘मृत’ मान लिया गया था।

2. नई पहचान और ‘एक्स मुस्लिम’ का चोला

फरार होने के बाद सलीम ने पंजाब, हरियाणा और अंबाला में शरण ली और अंततः 2010 में गाजियाबाद के लोनी में बस गया। यहाँ उसने अपनी पहचान बदलकर महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोली और बाद में जैकेट का कारोबार शुरू किया। हाल ही में उसने ‘सलीम वास्तविक एक्स मुस्लिम’ नाम से यूट्यूब चैनल शुरू किया। इस्लाम के खिलाफ नफरती बातें करके वह तेजी से चर्चित हो गया, जिससे स्थानीय पुलिस भी उसकी असलियत से अनजान रही।

3. जानलेवा हमला और खुली पोल

27 फरवरी 2026 को लोनी स्थित उसके कार्यालय पर जीशान और गुलफाम नामक युवकों ने उस पर चाकू से जानलेवा हमला किया था। इस हमले के बाद सलीम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया। जहाँ एक ओर यूपी एसटीएफ ने मुठभेड़ में हमलावरों को ढेर कर दिया, वहीं दूसरी ओर सलीम की बढ़ी हुई चर्चा ने दिल्ली क्राइम ब्रांच का ध्यान उसकी ओर खींचा। जब उसकी पुरानी फाइलों को खंगाला गया, तो ‘मृत’ घोषित अपराधी का चेहरा ‘यूट्यूबर’ सलीम से मेल खा गया।

4. सलाखों के पीछे पहुँचा ‘सलीम’

एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि 24 अप्रैल की रात दिल्ली क्राइम ब्रांच ने लोनी में छापेमारी कर उसे दबोच लिया। सलीम को अब तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। 26 साल बाद कानून के लंबे हाथों ने एक ऐसे मुजरिम को पकड़ लिया है जिसने न केवल एक बच्चे की जान ली, बल्कि नफरत के सहारे फर्जी शोहरत पाने की कोशिश की।


📝 विशेष कॉलम: मोरबत्तियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

Tariq Azmi (तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, नफरत की बुनियाद पर खड़ी की गई शोहरत का महल अक्सर अपनी ही कड़वाहट से ढह जाता है; कानून की चक्की धीरे चलती है, पर पीसती बहुत बारीक है!”

आज यूट्यूबर सलीम वास्तिक की गिरफ्तारी और उसके आपराधिक अतीत पर काका ने बड़े ही दार्शनिक अंदाज़ में चर्चा की।

काका बोले: “बबुआ, दुनिया को लगा कि ये कोई धर्म सुधारक या ‘एक्स मुस्लिम’ क्रांतिकारी है, पर निकला तो ई ‘बच्चे का कातिल’। 26 साल तक पहचान छिपाकर मासूमियत का ढोंग करता रहा और जब ‘नफरत’ बेचकर चर्चा में आया, तो वही चर्चा इसके गले की फाँस बन गई। अगर ये चुपचाप अपनी दुकान चलाता रहता, तो शायद कभी पकड़ा न जाता, पर इसे तो फर्जी शोहरत की भूख थी।”

मैंने पूछा— “काका, क्या नफरत फैलाना ही इसकी सबसे बड़ी गलती थी?”

काका का जवाब: “गलती तो इसकी 1995 में ही शुरू हो गई थी बबुआ, जब इसने एक 13 साल के मासूम की जान ली। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, पाप का घड़ा जब भरता है, तो वो शोर ज़रूर करता है’। नफरती बातें करके इसने खुद ही पुलिस को अपने घर का रास्ता दिखा दिया। अब तिहाड़ की सलाखें गिनते हुए इसे समझ आएगा कि असली ‘वास्तविकता’ क्या है।”


📊 अपराधी की प्रोफाइल: एक नज़र में (Criminal Dossier)

विवरण जानकारी
असली नाम सलीम खान (निवासी शामली)
फर्जी नाम सलीम अहमद / सलीम वास्तिक
अपराध संदीप बंसल (13 वर्ष) का अपहरण और हत्या (1995)
सजा आजीवन कारावास (1997 में घोषित)
फरारी का समय वर्ष 2000 से (26 साल)
नया पेशा जैकेट व्यापारी और ‘एक्स मुस्लिम’ यूट्यूबर
गिरफ्तारी 24 अप्रैल 2026, दिल्ली क्राइम ब्रांच द्वारा

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