‘वाराणसी: VDA की “सील” कागज़ी, हकीकत में “अवैध निर्माण” जारी; हुकुलगंज में दीवार गिरने से बड़ा हादसा; गरीबों की सिसकियों पर भारी पड़ा रसूख का शोर!’
वाराणसी: VDA की 'सुविधा शुल्क' और लापरवाही ने ली गरीबों की जान? हुकुलगंज-सिकरौल में दो बार सील हो चुकी अवैध बिल्डिंग की दीवार गिरी, कई मजदूर मलबे में दबे। सील के बावजूद रात में 'चोरी-छिपे' चल रहा था निर्माण, प्राधिकरण और पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल। PNN24 की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।

अनुराग पाण्डेय संग तारिक आज़मी की मोरबतियाँ
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। हुकुलगंज-सिकरौल क्षेत्र में 29 अप्रैल की देर शाम एक निर्माणाधीन अवैध बिल्डिंग की दीवार गिरने से भीषण हादसा हो गया। इस दुर्घटना में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए और गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ताज्जुब की बात यह है कि जिस बिल्डिंग में यह हादसा हुआ, उसे VDA पहले ही दो बार सील कर चुका था।
1. भ्रष्टाचार का खेल: स्टिल्ट+3 के नक्शे पर अवैध पिलर
VDA के आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार, श्री रामेश्वर तिवारी ने आवासीय मानचित्र (VDA/BP/23-24/0282) के तहत स्टिल्ट + 3 तलों की स्वीकृति ली थी। लेकिन मौके पर नक्शे के विपरीत सेटबैक कवर करते हुए लगभग 50×50 क्षेत्रफल में बेसमेंट+ग्राउंड+1 के ऊपर अवैध रूप से RCC पिलर खड़े किए जा रहे थे।
2. VDA की कार्रवाई की विफल टाइमलाइन
दस्तावेजों के अनुसार, यह बिल्डिंग प्रशासन और पुलिस की नाक के नीचे बन रही थी:
- पहली सील (01 मई 2025): अवैध निर्माण मिलने पर धारा-27 के तहत नोटिस देकर बिल्डिंग को सील किया गया और स्थानीय थाने की अभिरक्षा में दिया गया।
- दूसरी सील (12 मार्च 2026): VDA ने माना कि सील के बावजूद रात में चोरी-छिपे निर्माण चल रहा था। इसे रोकने के लिए धारा-28(क) के तहत दोबारा सील लगाकर थाने को सूचित किया गया।
- हादसा (29 अप्रैल 2026): दूसरी सील लगने के मात्र 48 दिन बाद बिल्डिंग की दीवार भरभराकर गिर गई।
3. लापरवाही के 3 बड़े सवाल
प्राधिकरण के दस्तावेजों से ही कई सवाल खड़े होते हैं:
- जब बिल्डिंग थाने की अभिरक्षा में थी, तो दोबारा निर्माण कैसे शुरू हुआ?
- 12 मार्च को दोबारा सील होने के बाद 48 दिनों तक कोई निगरानी क्यों नहीं की गई?
- ‘चोरी-छिपे’ निर्माण की जानकारी होने के बावजूद FIR दर्ज कराने में देरी क्यों हुई?
4. प्राधिकरण का पक्ष और कार्रवाई
VDA सचिव के अनुसार, अब संबंधित अवैध निर्माणकर्ता के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई जा रही है। सचिव ने चेतावनी दी है कि भविष्य में सील के उल्लंघन पर सीधे FIR होगी। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि यह मामला किसी अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्र का होता, तो अब तक बुलडोज़र चल चुका होता।
📝 विशेष कॉलम: मोरबत्तियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, जब आँखों पर ‘गांधी जी’ के नोटों की पट्टी बंधी हो, तो दीवारें क्या, इंसानियत भी गिर जाती है; रसूखदारों के लिए नोटिस महज़ एक कागज़ है और गरीबों के लिए काल!”
आज वाराणसी के इस निर्माण हादसे पर अ काका ने बड़े ही तल्ख अंदाज़ में प्रशासन को घेरा।
काका बोले: “बबुआ, काशी में ‘हर-हर मोदी’ के जयघोष के बीच उन गरीब मजदूरों की कराहें दब गईं, जो चंद रुपयों के लिए मौत के साये में काम कर रहे थे। VDA की सील तो मज़ाक बन गई है। साहब, थाने को चिट्ठी भेजकर ये लोग अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं, पर ज़मीन पर जो खेल चल रहा है, वो सबको पता है। 48 दिन तक निर्माण होता रहा और किसी को कानो-कान खबर नहीं हुई? ई तो वही बात हुई कि ‘अंधेर नगरी, चौपट राजा’।”
मैंने पूछा— “काका, क्या FIR से न्याय मिलेगा?”
काका का जवाब: “बबुआ, FIR तो ‘साँप निकलने के बाद लकीर पीटने’ जैसी है। जब तक उन अधिकारियों पर गाज नहीं गिरेगी जिन्होंने घुस लेकर आँखों पर पट्टी बांधी थी, तब तक ये दीवारें गिरती रहेंगी। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, बुलडोज़र सिर्फ गरीबों और मज़लूमों की बस्तियों का पता नहीं पूछता, कभी इन रसूखदारों के अवैध महलों की ओर भी मुड़ना चाहिए’।”
📊 हादसे का विवरण: एक नज़र में (Fact Sheet)
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
| स्थान | हुकुलगंज-सिकरौल, वाराणसी |
| निर्माणकर्ता | श्री रामेश्वर तिवारी |
| हादसे की तारीख | 29 अप्रैल 2026 |
| नक्शा/अवैधता | स्वीकृत स्टिल्ट+3 बनाम अवैध B+G+1 के ऊपर पिलर |
| VDA की कार्रवाई | 01 मई 2025 और 12 मार्च 2026 को सील की गई थी |
| वर्तमान स्थिति | FIR की कार्यवाही और घायलों की जांच जारी |












