‘दुधवा टाइगर रिजर्व में आसमान से बरस रही आग, 42 पार पहुंचा पारा; लाइफलाइन सुहेली नदी के बाद नकौवा नाला भी सूखने की कगार पर, प्यासे वन्यजीवों के लिए बनाए गए 120 कृत्रिम वॉटरहोल्स!’
लखीमपुर खीरी: दुधवा टाइगर रिजर्व में पारा 42 से 45 डिग्री पहुंचने से वन्यजीव बेहाल, तालाबों में सुस्ता रहे बाघ और हाथी। लाइफलाइन सुहेली नदी और नकौवा नाला सूखने की कगार पर। फील्ड डायरेक्टर राजा राममोहन राय ने कोर और बफर जोन में चालू किए 120 सोलर वॉटरहोल्स। पढ़ें PNN24 की ग्राउंड रिपोर्ट।

फारुख हुसैन
पलिया खीरी (PNN24 News): उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में इन दिनों मौसम के मिजाज ने तराई क्षेत्र को भट्टी की तरह तपा दिया है। आसमान से बरस रही आग के बीच जिले का पारा 42 डिग्री से लेकर 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और चिलचिलाती धूप से जहां आम इंसान बेहाल हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) के बेजुबान वन्यजीवों की हालत भी बेहद खराब है। तपन और लू का आलम यह है कि जंगल के पेड़-पौधे और प्राकृतिक जलस्रोत सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। चिलचिलाती धूप से बचने के लिए बाघ, हाथी, गेंडा और हिरणों के झुंड दिनभर वॉटरहोल्स और तालाबों के पानी में सुस्ताते हुए नजर आ रहे हैं।
🚨 खतरे में ‘लाइफलाइन’: सुहेली नदी के बाद अब नकौवा नाला भी बेदम
इस भीषण प्राकृतिक संकट के बीच सबसे चिंताजनक और डराने वाली बात यह है कि दुधवा जंगल की लाइफलाइन (जीवन रेखा) कही जाने वाली ‘सुहेली नदी’ पहले से ही बड़े पैमाने पर सिल्ट (मिट्टी और गाद) जमा होने के चलते अपने अस्तित्व की आखिरी लड़ाई लड़ रही है। इस बीच, जंगल के भीतर वन्यजीवों की प्यास बुझाने का दूसरा बड़ा जरिया ‘नकौवा नाला’ भी इस भीषण तपन में सूखने की कगार पर पहुंच गया है। नदी की तरह इस नाले में भी लगातार सिल्ट जमा हो रही है, लेकिन अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों और सिंचाई विभाग का ध्यान इस ओर नहीं गया है। इसके चलते तराई के घने जंगलों में वन्यजीवों के सामने प्यास बुझाने का एक गंभीर संकट खड़ा होता दिख रहा है।
☀️ आबादी की ओर न भागें वन्यजीव, प्रशासन ने चालू किए 120 सोलर वॉटरहोल्स
भीषण गर्मी में पानी की तलाश में भटककर हिंसक वन्यजीव जंगल से बाहर इंसानी आबादी वाले ग्रामीण इलाकों की तरफ न निकलें और मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Wildlife Conflict) न हो, इसके लिए पार्क प्रशासन ने गर्मी शुरू होने से पहले ही एक विशेष कार्ययोजना तैयार की थी:
- कृत्रिम तालाबों का निर्माण: इस योजना के तहत विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के सहयोग से पूरे दुधवा टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन में हर 10-10 किलोमीटर के दायरे में अप्राकृतिक और कृत्रिम वॉटरहोल्स (तालाब) तैयार किए गए हैं।
- पंप सेट और सोलर एनर्जी: इन सभी कृत्रिम तालाबों में पंप सेटों और अत्याधुनिक सोलर पंपों की मदद से लगातार पानी भरा जा रहा है, ताकि भीषण धूप में भी पानी की उपलब्धता बनी रहे और वन्यजीवों को भटकना न पड़े।
🐅 चौबीसों घंटे सघन निगरानी जारी: फील्ड डायरेक्टर राजा राममोहन राय
बढ़ते संकट और प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी देते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर राजा राममोहन राय ने बताया कि लगातार बढ़ रही गर्मी और लू को देखते हुए पार्क प्रशासन पूरी तरह सतर्क और हाई-अलर्ट पर है। वन्यजीवों को पानी की किल्लत न हो, इसके लिए पूरे रिजर्व क्षेत्र के कोर जोन में 90 और बफर जोन में 30 कृत्रिम वॉटरहोल्स सक्रिय किए गए हैं।
इन सभी 120 वॉटरहोल्स में सोलर पंपों के जरिए लगातार पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही, वन रक्षकों और स्पेशल प्रैक्टर टीमों द्वारा वन्यजीवों की चौबीसों घंटे सघन निगरानी (24/7 Monitoring) की जा रही है ताकि इस भीषण गर्मी के मौसम में उन्हें किसी भी तरह की परेशानी या बीमारी का सामना न करना पड़े और वे सुरक्षित ढंग से अपने प्राकृतिक आवास में रह सकें।











