‘ज्ञानवापी मस्जिद की दीवार “गेरुआ” करने पर बवाल; एसएम यासीन बोले- “ज़ुल्म सहना भी ज़ालिम की हिमायत है”; प्रशासन ने दिया पुरानी स्थिति बहाल करने का भरोसा!’
वाराणसी: ज्ञानवापी मस्जिद की दीवार को गेरुआ रंग से रंगने पर मुस्लिम समाज में भारी आक्रोश。 अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के एसएम यासीन ने इसे 'शरारतपूर्ण' बताया और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की。 मुफ्ती-ए-बनारस के एतराज के बाद प्रशासन ने पुरानी स्थिति बहाल करने का दिया आश्वासन。 PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे के दौरान शहर में हुई साज-सज्जा के बीच ज्ञानवापी मस्जिद की एक दीवार को गेरुआ रंग से रंगे जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है。 मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह दीवार मस्जिद की संपत्ति है और इसे बिना अनुमति रंगना मुस्लिम समाज को उकसाने की कोशिश है。
1. मुफ्ती-ए-बनारस का सख्त एतराज
नमाज़-ए-जुमा से पूर्व मुफ़्ती-ए-बनारस मौलाना बातिन नोमानी ने इस मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया。 उनके हस्तक्षेप और डीसीपी सुरक्षा से मुलाकात के बाद प्रशासन ने लिखित रूप से आश्वासन दिया है कि दीवार की पूर्व स्थिति को बरकरार रखा जाएगा。
2. “यह मिलीभगत से की गई शरारत है” – एसएम यासीन
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है。 उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासन के कारिंदों द्वारा की गई यह कार्रवाई पूरी तरह शरारतपूर्ण है。
- चित्रकारी पूरी दीवार पर न होकर सिर्फ मस्जिद के चैनल गेट के पास की गई है, जिससे मंशा स्पष्ट होती है。
- उन्होंने कहा, “ज़ुल्म सहना भी ज़ालिम की हिमायत है।” उनका मानना है कि इसका मकसद शहर का माहौल खराब करना है。
3. प्रशासन से सख्त कार्यवाही की मांग
एसएम यासीन ने मंडलायुक्त और अन्य आला अधिकारियों से निवेदन किया है कि ऐसे साजिशी तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाए。 उन्होंने संयम बनाए रखने के लिए मुस्लिम समुदाय की सराहना की और मांग की कि चित्रों को हटाकर मस्जिद गेट को पूर्ववत किया जाए。
📝 विशेष कॉलम: मोरबत्तियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, रंग तो प्रेम का प्रतीक होना चाहिए, पर जब रंग का इस्तेमाल ‘सियासत’ और ‘शरारत’ के लिए होने लगे, तो गंगा-जमुनी तहजीब की दीवारें चटकने लगती हैं!”
आज ज्ञानवापी की दीवार पर चढ़े गेरुआ रंग और उस पर मचे शोर पर काका ने बड़े ही संजीदा लहजे में अपनी बात रखी।
काका बोले: “बबुआ, काशी वो शहर है जहाँ हर रंग महादेव के रंग में मिल जाता है। पर जब बिना पूछे किसी की मिल्कियत पर रंग पोता जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है। एसएम यासीन साहब की बात में दर्द भी है और चेतावनी भी। प्रशासन को समझना चाहिए कि वीवीआइपी दौरे की चकाचौंध में किसी की भावनाओं का रंग फीका नहीं पड़ना चाहिए।”
मैंने पूछा— “काका, क्या आश्वासन से मामला शांत हो जाएगा?”
काका का जवाब: “आश्वासन तो कागज़ी मरहम है बबुआ, असली सुकून तब मिलेगा जब आपसी भरोसा बहाल होगा। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, शहर की शांति बहुत नाजुक होती है, इसे शरारतों के रंग से नहीं, बल्कि भाईचारे की सफेदी से बचाकर रखना चाहिए’। अब देखना ये है कि प्रशासन अपनी लिखी बात कितनी जल्दी पूरी करता है।”
PNN24 News की विशेष अपील: शहर की शांति और सद्भाव बनाए रखें। किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और प्रशासनिक कार्यवाही का इंतज़ार करें। जुड़े रहें हमारे साथ।













