क्या ‘Iran-US Peace Deal’ अमेरिका की सबसे बड़ी हार है? क्या अमेरिका जंग हार गया?
Iran-US Peace Deal पूरी तरह से अमेरिका की सैन्य हार नहीं, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक समझौता और अमेरिकी नीतियों का पीछे हटना (Strategic Retreat) माना जा रहा है:

आदिल अहमद
भू-राजनीतिक (Geopolitical) नजरिए से इसे पूरी तरह से अमेरिका की सैन्य हार नहीं, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक समझौता और अमेरिकी नीतियों का पीछे हटना (Strategic Retreat) माना जा रहा है:
ईरान का दावा: ईरान के रक्षा और विदेश मंत्रालय ने इसे अपनी “ऐतिहासिक जीत” घोषित किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी नौसेना के कड़े ब्लॉकेड (नाकेबंदी) और हमलों के बावजूद ईरान झुका नहीं और उसने अमेरिका को टेबल पर आने के लिए मजबूर कर दिया।
- अमेरिका का रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) का कहना है कि यह जंग को रोकने और वैश्विक तेल संकट (Oil Price Spike) को खत्म करने के लिए उठाया गया एक व्यावहारिक कदम है, न कि कोई हार। हालांकि, अमेरिकी विपक्ष और कई विश्लेषक इसे ट्रंप प्रशासन के कड़े रुख की विफलता और ईरान के सामने आत्मसमर्पण के रूप में देख रहे हैं।
2. MoU की 14 शर्तों में क्या-क्या है?
अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित इस 1.5 पन्ने के समझौते (MoU) के प्रमुख 14 बिंदु (14 Points) इस प्रकार हैं:
- युद्धविराम: लेबनान फ्रंट समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों का तत्काल और स्थायी अंत।
- नौसैनिक नाकेबंदी का अंत: अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान के बंदरगाहों से अपना नौसैनिक ब्लॉकेड पूरी तरह हटा लेगा।
- सेना की वापसी: अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के नजदीकी इलाकों से अपनी सेनाएं हटाएगा।
- फ्री शिपिंग (60 दिन): ईरान अगले 60 दिनों तक फारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी तक व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित और मुफ्त रास्ता देगा।
- सुरक्षित समुद्री कॉरिडोर: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के भविष्य के प्रबंधन के लिए ईरान ओमान और अन्य खाड़ी देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत बातचीत करेगा।
- पुनर्निर्माण फंड: अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी मुल्क ईरान के लिए कम से कम $300 बिलियन (300 अरब डॉलर) का पुनर्निर्माण प्लान तैयार करेंगे।
- परमाणु प्रतिबंध: ईरान पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) विकसित या हासिल नहीं करेगा।
- संवर्धित सामग्री (Enriched Material): दोनों पक्ष ईरान में स्टॉक किए गए संवर्धित यूरेनियम के निपटारे पर सहमत हुए हैं।
- प्रतिबंधों की समाप्ति: अमेरिका एक तय शेड्यूल के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और अपने सभी एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों को खत्म करेगा।
- यथास्थिति (Status Quo): ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को वर्तमान स्थिति पर रोक कर रखेगा, और अमेरिका क्षेत्र में नई सेनाएं तैनात नहीं करेगा।
- तेल निर्यात की छूट: समझौता होते ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान को कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात और बैंकिंग लेनदेन के लिए छूट (Waivers) जारी करेगा।
- फ्रीज एसेट्स की बहाली: अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय बैंकों में ब्लॉक/फ्रीज की गई ईरान की पुरानी संपत्तियों को तुरंत बहाल किया जाएगा।
- 60 दिनों की वार्ता: इस बुनियादी समझौते के बाद अगले 60 दिनों के भीतर एक स्थायी और पूर्ण शांति समझौते (Final Deal) के लिए विस्तृत बातचीत होगी।
- वार्ता का दायरा: समझौते के मुख्य बिंदुओं (1, 4, 5, 10, 11) के लागू होने के साथ ही शेष बचे हुए तकनीकी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा शुरू की जाएगी।
3. क्या ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ‘टोल’ वसूलेगा?
नहीं, सीधे शब्दों में कहें तो ‘टोल’ (Tax) नहीं वसूला जाएगा, लेकिन ‘सर्विस फीस’ ली जाएगी:
- अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि दीर्घकालिक रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ‘टोल-फ्री’ (Toll-Free) यानी पूरी तरह कर-मुक्त रखा जाएगा।
- हालांकि, इसके तुरंत बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर साफ किया कि वह जहाजों से कोई ‘टोल’ तो नहीं वसूलेगा, लेकिन खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों से “मैरीटाइम सर्विस फीस” (Maritime Service Fees – समुद्री सेवा शुल्क) लेने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
4. ईरान को 300 अरब डॉलर कौन देगा और क्यों?
MoU की शर्तों के अनुसार, युद्ध से तबाह हो चुके ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर ($300 Billion) का एक ‘पुनर्निर्माण फंड’ (Reconstruction Fund) प्रस्तावित किया गया है।
- कौन देगा? यह पैसा अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी देश (जैसे यूरोपीय देश और कुछ खाड़ी के मुल्क) मिलकर जुटाएंगे। इसे एक तरह से युद्ध के हर्जाने या मुआवजे (War Damages/Compensation) के रूप में देखा जा रहा है।
- शर्त क्या है? अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान को यह पैसा एकमुश्त या तुरंत नहीं मिलेगा। यह फंड पूरी तरह से “परफॉर्मेंस-लिंक्ड” (Tied to Performance) होगा। यानी जैसे-जैसे ईरान परमाणु कार्यक्रम को रोकने और आतंकवाद की फंडिंग न करने की शर्तों को पूरा करेगा, वैसे-वैसे यह पैसा किश्तों में रिलीज किया जाएगा।










