‘अहमदाबाद में “महापाप” का पर्दाफाश: 276 बच्चों से भीख मंगवाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़; राजस्थान-MP के सरपंच निकले सिंडिकेट के दलाल!’

अहमदाबाद में मानवता शर्मसार: क्राइम ब्रांच ने किया अंतरराज्यीय बाल तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफाश, 276 बच्चे रेस्क्यू। राजस्थान और मध्य प्रदेश के सरपंचों पर बच्चों की 'दलाली' करने और कमाई का 20% हिस्सा खाने का आरोप। कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 अभियान के दौरान खुली पोल। बच्चों के पुनर्वास के लिए बड़ी योजना शुरू। पढ़ें PNN24 की विशेष खोजी रिपोर्ट।

मो0 सलीम

अहमदाबाद (PNN24 News): गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद में मासूमों के बचपन का सौदा करने वाले एक बेहद घिनौने और संगठित अंतरराज्यीय बाल तस्करी रैकेट (Interstate Child Trafficking Syndicate) का भंडाफोड़ हुआ है। अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक व्यापक अभियान के तहत अब तक 276 ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें रेस्क्यू किया है, जिन्हें दूसरे राज्यों की सीमाओं से लाकर शहर के मॉल, अस्पतालों, प्रसिद्ध मंदिरों और प्रमुख ट्रैफिक सिग्नलों पर भीख मांगने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

इस पूरे सिंडिकेट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके राजनैतिक और सामाजिक गठजोड़ को लेकर बेहद परेशान करने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।

🏃 कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 अभियान के दौरान खुला राज

दरअसल, अहमदाबाद शहर को साल 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games 2030) की मेजबानी मिली है। इसी के मद्देनजर अहमदाबाद नगर निगम (AMC) और क्राइम ब्रांच संयुक्त रूप से सड़कों को भिक्षु-मुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए एक विशेष रेस्क्यू अभियान चला रहे थे।

इसी अभियान के दौरान जब सड़कों पर भीख मांग रहे बच्चों की काउंसलिंग की गई और उनके बैकग्राउंड को खंगाला गया, तो पुलिस के हाथ इस बड़े नेक्सस के तार लगे। क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को बताया:

“सड़कों पर दिखने वाले सभी बच्चे सामान्य भिखारी नहीं हैं। वे एक बेहद सुनियोजित और ऑर्गनाइज्ड नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो कई राज्यों में फैला हुआ है। इनमें से अधिकांश बच्चे अत्यंत गरीब और लाचार परिवारों से आते हैं, जिनके माता-पिता बड़े शहरों में भीख मांगने को ही अपनी कमाई का मुख्य जरिया मान बैठे थे।”

🤝 सरपंच बने ‘दलाल’: बच्चों की कमाई से लेते थे 20% कमीशन

पुलिस जांच में इस रैकेट की जो कार्यप्रणाली (Modus Operandi) सामने आई है, वह बेहद हैरान करने वाली है। यह पूरा सिंडिकेट सीधे ग्रामीण स्तर से संचालित हो रहा था:

  • कमजोर परिवारों की पहचान: गुजरात का भीख मांगवाने वाला यह मुख्य सिंडिकेट राजस्थान और मध्य प्रदेश के सुदूर ग्रामीण इलाकों के गांव के सरपंचों से संपर्क साधता था। ये सरपंच पैसों के लालच में अपने ही क्षेत्र के सबसे गरीब और कमजोर परिवारों की पहचान करते थे।
  • पैसों का सौदा: सिंडिकेट से मिलने वाली मोटी रकम का एक छोटा सा हिस्सा सरपंच इन मजबूर माता-पिता को एडवांस के तौर पर थमा देते थे और बाकी का पैसा खुद डकार जाते थे।
  • कमीशन का खेल: विडंबना यह है कि बच्चों को गुजरात भेजने के बाद भी सरपंचों का लालच खत्म नहीं होता था। वे इन मासूमों द्वारा दिनभर में की जाने वाली कुल कमाई का 20% हिस्सा लगातार कमीशन के रूप में वसूलते रहते थे।

🗺️ लोकेशन के हिसाब से होती थी बच्चों की विधिक ‘तैनाती’

जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह सिंडिकेट पूरी कॉर्पोरेट स्टाइल में काम करता था। बच्चों को भीख मांगने के लिए उनकी उम्र और कमाई की संभावना (Earning Potential) के आधार पर जगहों पर तैनात किया जाता था।

  • धार्मिक स्थल अव्वल: सबसे अधिक भीड़भाड़ वाले मंदिरों और धार्मिक स्थलों को पहली प्राथमिकता दी जाती थी, क्योंकि वहां लोग श्रद्धा में अधिक पैसे देते हैं। इसके बाद शॉपिंग मॉल, बड़े अस्पताल और प्रमुख ट्रैफिक जंक्शन्स पर बच्चों को तैनात किया जाता था।

पुलिस ने इस घिनौने रैकेट में शामिल कई सरपंचों और दोषी माता-पिता की विधिक पहचान पूरी कर ली है। इन सभी के खिलाफ बाल तस्करी विरोधी सख्त विधिक धाराओं (Anti-Human Trafficking Laws) के तहत मामला दर्ज कर सख्त विधिक कार्रवाई की जा रही है।

🎒 रेस्क्यू किए गए 276 बच्चों के पुनर्वास (Rehabilitation) की बड़ी योजना

अहमदाबाद प्रशासन ने इस दलदल से मुक्त कराए गए सभी 276 बच्चों को फिलहाल सुरक्षित शेल्टर होम्स (Shelter Homes) में भेज दिया है। राज्य सरकार ने इन बच्चों के भविष्य को सुधारने के लिए एक व्यापक पुनर्वास नीति (Rehabilitation Action Plan) को हरी झंडी दे दी है:

  1. मुफ्त शिक्षा: सभी बच्चों का अनिवार्य रूप से स्थानीय सरकारी प्राथमिक विद्यालयों (Government Primary Schools) में दाखिला कराया जाएगा।
  2. मूलभूत सुविधाएं: प्रशासन द्वारा इनके लिए पौष्टिक भोजन, रहने की व्यवस्था और कपड़ों का पूरा खर्च उठाया जाएगा।
  3. मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग: चूंकि ये बच्चे लंबे समय तक मानसिक और शारीरिक शोषण का शिकार रहे हैं, इसलिए विधिक और चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में इन्हें थेरेपी और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग (Psychological Counselling) दी जा रही है ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें।

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